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पुनावली दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने किया पर्दाफाश, लूट की साजिश में पांच आरोपी गिरफ्तार*

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*पुनावली दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने किया पर्दाफाश, लूट की साजिश में पांच आरोपी गिरफ्तार*

पड़ोसी ने साथियों के साथ मिलकर बुजुर्ग दंपती को बनाया निशाना, रेकी के बाद वारदात को दिया अंजाम; पुलिस ने वाहन भी किया बरामद
कांतिलाल मांडोत
उदयपुर 27 अगस्त
सायरा थाना क्षेत्र के पुनावली गांव में बुजुर्ग दंपती की हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार वारदात के पीछे लूट की नीयत थी। मृतक दंपती के पड़ोसी ने अपने साथियों के साथ मिलकर काफी समय पहले साजिश तैयार की और मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में प्रयुक्त वाहन भी बरामद किया है। मामले के खुलासे में तकनीकी जांच के साथ पुलिस की पारंपरिक जांच और लगातार पूछताछ की अहम भूमिका रही।


पुलिस अधीक्षक उदयपुर डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि 12 अगस्त को पुनावली निवासी धुलीराम पालीवाल ने पुलिस थाना सायरा में रिपोर्ट दी थी कि उनके बड़े भाई लहरीलाल पालीवाल और भाभी राधाबाई घर पर नहीं हैं। घर का गेट खुला हुआ था, लेकिन दोनों घर के भीतर नहीं मिले। परिजनों ने उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। परिवार और रिश्तेदारों ने अपने स्तर पर भी काफी तलाश की, मगर जब दोनों का कोई पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी गई।
रिपोर्ट के आधार पर एमपीआर नंबर 39/2026 दर्ज कर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। गुमशुदा दंपती की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में लोगों से पूछताछ की। इसके साथ ही दोनों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन को खंगाला गया। जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले। तलाश के क्रम में 14 अगस्त को दोनों के शव उनके घर के अंदर एक संदूक से बरामद हुए। शव मिलने के बाद मामला गुमशुदगी से बदलकर दोहरे हत्याकांड में तब्दील हो गया और पुलिस ने जांच को और तेज कर दिया।

 

घटना की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल, एमओबी और डॉग स्क्वाड की मदद से घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और यह पता लगाने का प्रयास किया कि आरोपी किस रास्ते से घर में दाखिल हुए, वारदात के बाद किस दिशा में गए और उन्होंने पुलिस को गुमराह करने के लिए क्या-क्या प्रयास किए। दूसरी ओर मृतक दंपती के संपर्क में रहने वाले लोगों, पड़ोसियों और अन्य संदिग्धों की गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई गई।
तकनीकी जांच में पुलिस को मृतकों के मोबाइल फोन की गतिविधियों से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को आपस में जोड़कर पुलिस ने संदिग्धों की पहचान की। इसके साथ ही सूचना संकलन, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण और पारंपरिक पुलिस अनुसंधान तकनीक का भी सहारा लिया गया। लगातार जांच और पूछताछ के बाद पुलिस की नजर उन लोगों तक पहुंची, जिनकी गतिविधियां घटना से पहले और बाद में संदिग्ध पाई गईं।

 

जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कुशल उर्फ खुशी पालीवाल को जानकारी थी कि लहरीलाल पालीवाल के पास काफी धन है। उसे यह भी मालूम था कि बुजुर्ग दंपती घर में अकेले रहते हैं। पुलिस के अनुसार इसी जानकारी के आधार पर उसके मन में चोरी और लूट का विचार आया। आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के कारण आरोपी ने दंपती के घर को निशाना बनाने की योजना तैयार की। यह कोई अचानक बनाई गई योजना नहीं थी, बल्कि इसकी तैयारी काफी समय से चल रही थी।
पुलिस के मुताबिक करीब एक से डेढ़ वर्ष पहले आरोपी के मन में वारदात की योजना बनी थी। बाद में कुछ माह पहले वह अपने साथी चन्दन के साथ गांव आया। इसके बाद विकास और दिलीप को भी योजना में शामिल किया गया। वारदात से करीब एक माह पहले आरोपियों ने दंपती के घर और उनकी दिनचर्या से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी। इस दौरान उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि दंपती कब घर पर रहते हैं, घर में कौन-कौन आता-जाता है और वारदात के लिए किस समय को उपयुक्त माना जा सकता है।
पुलिस के अनुसार 9 अगस्त को आरोपी अपने साथियों के साथ कार से गोगुन्दा आया और क्षेत्र में घूमने के बाद एक होटल में रुका। इसके बाद आरोपियों ने पुनावली पहुंचकर मृतक दंपती के घर की रेकी की। 10 अगस्त को भी आरोपी पुनावली पहुंचे और वारदात को अंजाम देने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें उस समय घर में प्रवेश का मौका नहीं मिला। इसके बाद आरोपियों ने अगले दिन फिर से योजना बनाई और अपने परिचितों की मदद से घर में प्रवेश का अवसर तैयार किया।

 

इसके बाद मुख्य आरोपी और उसके साथियों ने घर में प्रवेश कर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच के अनुसार वारदात के बाद आरोपियों ने मामले को छिपाने और पुलिस को भ्रमित करने के लिए साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। दंपती के शवों को घर के अंदर रखे संदूक में छिपा दिया गया। इसके बाद घर से नकदी, आभूषण और अन्य सामान लेकर आरोपी वहां से निकल गए। पुलिस के अनुसार मृतकों के मोबाइल फोन भी रास्ते में फेंक दिए गए, ताकि जांच को भ्रमित किया जा सके और आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो।
पुलिस जांच में आरोपियों की आर्थिक स्थिति भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों को अच्छी जीवनशैली जीने का शौक था और इसी वजह से उन्होंने लोगों तथा बैंकों से उधार और ऋण लिया था। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता गया। पुलिस का कहना है कि इसी आर्थिक संकट से निकलने और पैसों की व्यवस्था करने के उद्देश्य से आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को निशाना बनाया।


मामले में पुलिस ने कुशल उर्फ खुशी पालीवाल, चन्दन यादव, दिलीप चौधरी, किशन पालीवाल और जीवन पालीवाल को गिरफ्तार किया है। इनमें कुशल पालीवाल पुनावली का निवासी है और वर्तमान में गुजरात के सूरत जिले के सचिन क्षेत्र में रह रहा था। चन्दन यादव मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला है और वर्तमान में सचिन, सूरत में रह रहा था। दिलीप चौधरी भी सचिन, सूरत में रहता था। किशन और जीवन पालीवाल पुनावली क्षेत्र के निवासी हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपियों से पूछताछ में वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल वाहन बरामद कर लिया है। मामले में लूटे गए सामान और अन्य साक्ष्यों के संबंध में भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।


इस दोहरे हत्याकांड के खुलासे में सायरा और गोगुन्दा थाना पुलिस के साथ जिला विशेष टीम और जिला साइबर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जांच टीम में सायरा थानाधिकारी शैतान सिंह, गोगुन्दा थानाधिकारी प्रवीण सिंह राजपुरोहित, डीएसटी प्रभारी भरत योगी, गोवर्धन विलास थानाधिकारी सुनील चारण, जिला साइबर सेल के उप निरीक्षक फैलीराम और बेकरिया थानाधिकारी रामावतार मीणा सहित पुलिस के अधिकारी और जवान शामिल रहे।
इसके अलावा राजेन्द्र सिंह, गजराज सिंह, भंवर सिंह, विक्रम सिंह, अखिलेश, गणपतनाथ, धर्मवीर, भरतसिंह, कुलदीप सिंह, जितेन्द्र सिंह, कमलेश, भूपेन्द्र सिंह, रामदयाल, चरणसिंह, नरेन्द्रसिंह, दिनेश सिंह, श्रवण, रूपाराम, पुष्पराजसिंह, वीरेन्द्र, नरपतराम, लोकेन्द्र सिंह, हस्तिराम, लोकेश, धर्मेन्द्र कुमार, भूपेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश, वीरेन्द्र सिंह, सुमित, सुमेर सिंह, निम्बाराम, शिंभुराम और अचलाराम सहित पुलिसकर्मियों ने जांच और आरोपियों तक पहुंचने में सहयोग किया।

पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और पूछताछ को आधार बनाकर इस वारदात की कड़ियां जोड़ीं। करीब दो सप्ताह के भीतर गुमशुदगी से शुरू हुई जांच दोहरे हत्याकांड के खुलासे तक पहुंची। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं का भी पता लगाया जा रहा है।

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