आस्था के रंग में सजा गणेशोत्सव का भव्य संसार*
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*आस्था के रंग में सजा गणेशोत्सव का भव्य संसार*
देशभर में गणेशोत्सव पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में इस पर्व की छटा देखते ही बन रही है। मुंबई से लेकर जालना, पुणे और प्रदेश के अन्य शहरों तक गणपति पंडालों में उमड़ रही भीड़ आस्था की गहराई के साथ बदलते समय की रचनात्मकता को भी सामने ला रही है। गणेशोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सहभागिता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामूहिक उत्साह का बड़ा पर्व बन चुका है। मुंबई का लालबागचा राजा इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष लालबागचा राजा गणेशोत्सव 14 सितंबर से 25 सितंबर तक मनाया जा रहा है।
लालबागचा राजा के दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं के साथ फिल्म जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक लोग भी पहुंचे हैं। अभिनेता रणवीर सिंह, शिल्पा शेट्टी, किकू शारदा, मनोज जोशी और सयाजी शिंदे सहित कई कलाकारों ने गणपति के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। शिल्पा शेट्टी परिवार के साथ गणपति उत्सव में शामिल हुईं, जबकि रणवीर सिंह भी लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचे।
गणेशोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी दिखाई देती है। उद्योग जगत से गौतम सिंघानिया जैसे लोग भी लालबागचा राजा के दर्शन कर चुके हैं। क्रिकेट जगत में सूर्यकुमार यादव ने परिवार के साथ दर्शन किए और अपनी आस्था से जुड़े अनुभव साझा किए।
मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान अंबानी परिवार ने भी अपने निवास पर गणेशोत्सव मनाया। नीता अंबानी, अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट सहित परिवार के सदस्यों ने उत्सव में भाग लिया। अभिनेता शाहरुख खान भी अंबानी परिवार के गणपति समारोह में शामिल हुए। विसर्जन के अवसर पर भी मुंबई में फिल्म और उद्योग जगत से जुड़े अनेक लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ दिखाई दिए।
भक्ति के साथ भव्यता और रचनात्मकता का संगम
गणेशोत्सव की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण पंडालों और प्रतिमाओं में दिखाई देने वाली रचनात्मकता भी है। महाराष्ट्र के जालना में श्री अनोखा गणेश मंडल ने 108 किलो चांदी से बनी तथा सोने की परत से सजी गणेश प्रतिमा स्थापित की है। इसकी कीमत करीब चार करोड़ रुपये बताई गई है। प्रतिमा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मुंबई के जीएसबी सेवा मंडल की गणेश प्रतिमा भी सोने-चांदी की भव्य सजावट के कारण आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस वर्ष वहां प्रतिमा को 66 किलो सोने और 335 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है।
भव्यता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी गणेशोत्सव में दिखाई दे रहा है। हैदराबाद में राम सेतु की थीम पर 14.5 फीट ऊंची पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा बनाई गई है। महाराष्ट्र के वाशिम में सुपारी, सौंफ और पान में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा तैयार की गई। विजयवाड़ा में हजारों टॉफियों, जेली कैंडी, चॉकलेट और रंग-बिरंगे लॉलीपॉप से गणेश प्रतिमा बनाकर युवाओं ने अपनी कल्पनाशीलता का परिचय दिया।
सूरत में गणेशोत्सव के दौरान विश्व कप और क्रिकेट की थीम पर तैयार पंडाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना। पंडाल को छोटे क्रिकेट स्टेडियम का रूप दिया गया, जिसमें पिच, फ्लडलाइट और विकेट जैसी सजावट की गई। जबलपुर में गणपति को राजस्थानी राजाओं के रूप में सजाकर ऊंट पर विराजमान किया गया। कहीं धार्मिक कथाओं को पंडाल का आधार बनाया गया तो कहीं सामाजिक संदेशों को गणपति उत्सव से जोड़ा गया। यह विविधता बताती है कि परंपरा के साथ नई पीढ़ी अपनी कल्पना भी जोड़ रही है।
गणेशोत्सव में श्रद्धालुओं की भेंट और दान भी आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लालबागचा राजा मंडल में दानपात्र खोले जाने पर सोने-चांदी के आभूषण, हीरे की ज्वेलरी और डॉलर की मालाएं जैसी भेंट सामने आईं। 19 सितंबर तक शुरुआती पांच दिनों में मंडल को 3.1 करोड़ रुपये नकद, 1.12 किलोग्राम सोना और 19.75 किलोग्राम चांदी प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है।
नई पीढ़ी के उत्साह से मजबूत होती परंपरा
गणेशोत्सव की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें युवाओं की भागीदारी लगातार दिखाई दे रही है। पंडालों की सजावट से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों और विसर्जन यात्राओं तक युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उनके लिए गणेशोत्सव केवल पूजा का अवसर नहीं बल्कि अपनी संस्कृति से जुड़ने और सामूहिक रूप से उत्सव मनाने का माध्यम भी बन रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग शहरों के गणेशोत्सव की झलक देशभर तक पहुंच रही है, जिससे इस पर्व की सांस्कृतिक पहुंच और व्यापक हो रही है।
मुंबई में गणपति विसर्जन के दौरान भी फिल्मी दुनिया के सितारे और प्रमुख परिवार उत्सव में शामिल हुए। शिल्पा शेट्टी ने परिवार के साथ ढोल-नगाड़ों के बीच बप्पा को विदाई दी। अंबानी परिवार भी विसर्जन यात्रा में शामिल हुआ। अभिनेता गोविंदा ने अपने बेटे के साथ गणपति विसर्जन की रस्म निभाई।
राजनीतिक क्षेत्र से भी कई प्रमुख चेहरे गणेशोत्सव में श्रद्धा के साथ शामिल हुए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन किए। महाराष्ट्र के राजनीतिक नेताओं की गणपति दर्शन में भागीदारी इस पर्व की व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता को दर्शाती है। गणेशोत्सव के अवसर पर विभिन्न राजनीतिक विचारों से जुड़े नेता भी सार्वजनिक रूप से गणपति के दर्शन करते रहे हैं।
गणेशोत्सव की असली शक्ति उसकी भव्य सजावट या प्रसिद्ध लोगों की मौजूदगी भर में नहीं है। इसकी ताकत उस सामूहिक भावना में है, जिसमें सामान्य परिवार, युवा, बुजुर्ग, कलाकार, खिलाड़ी, उद्योगपति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग एक साथ भगवान गणेश के सामने श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। मुंबई की गलियों से लेकर देश के छोटे शहरों तक गणपति बप्पा के जयकारे लोगों को जोड़ते हैं।
यह पर्व भारतीय समाज की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें धर्म के साथ कला, संस्कृति, सेवा और सामाजिक सहभागिता जुड़ी हुई है। समय के साथ प्रतिमाओं की शैली बदली है, पंडालों की सजावट बदली है और उत्सव मनाने के तरीके भी बदले हैं, लेकिन श्रद्धा का भाव कायम है। यही कारण है कि गणेशोत्सव हर वर्ष नए उत्साह के साथ लौटता है और सार्वजनिक जीवन में उमंग, एकता और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण पैदा करता है। गणपति बप्पा के जयकारों के बीच यही संदेश उभरता है कि आस्था जब समाज को जोड़ती है तो वह केवल धार्मिक पर्व नहीं रहती, बल्कि जनउत्साह की जीवंत अभिव्यक्ति बन जाती है।
*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*
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