सात साल में भी तरपाल और विसमा पंचायत के गांवों को नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं,कहीं पेयजल संकट तो कहीं सड़क और नाली का अभाव, ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद समस्याएं जस की तस*
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*सात साल में भी तरपाल और विसमा पंचायत के गांवों को नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं,कहीं पेयजल संकट तो कहीं सड़क और नाली का अभाव, ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद समस्याएं जस की तस*
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 24 अक्टूबर 26
गांवों के विकास को देश के विकास की मजबूत कड़ी माना जाता है, लेकिन जब ग्रामीणों को सात साल तक सड़क, पेयजल, नाली और पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए बार-बार गुहार लगानी पड़े तो पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्राम पंचायत तरपाल और विसमा पंचायत के कई गांवों और मोहल्लों में ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर सरपंच और सचिव को कई बार अवगत कराया, लेकिन आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। अब पंचायतीराज चुनाव नजदीक आने के साथ ही ग्रामीणों में अधूरे विकास कार्यों को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में अनेक बार पंचायत के समक्ष सीसी सड़क, पेयजल व्यवस्था, नालियों और मिनी पुलिया निर्माण की मांग रखी गई। पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कार्य कराने से इनकार तो नहीं किया, लेकिन धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार आज भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार भरोसा दिलाया जाता है कि समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा, लेकिन समय बीतने के साथ आश्वासन ही मिलते रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि के बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों परेशान होना पड़ रहा है।
विसमा पंचायत के हायला गांव में रास्ते का संकट
विसमा पंचायत के हायला गांव स्थित गण्डवरी मोहल्ले में पेयजल और आवागमन की समस्या गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, मोहल्ले में पेयजल के लिए लगा हैंडपंप भी खराब पड़ा है। वहीं करीब दो किलोमीटर तक पक्की सड़क नहीं होने से लोगों को पत्थरों के ऊपर से गुजरकर आवागमन करना पड़ता है। बारिश के दौरान नाले में पानी भर जाने से रास्ता और अधिक कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के समय पानी का स्तर गले तक पहुंच जाता है और कई दिनों तक घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने मिनी पुलिया निर्माण की मांग पंचायत के समक्ष रखी। उनका आरोप है कि सरपंच और सचिव ने निर्माण का आश्वासन दिया, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता नहीं होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों, बुजुर्गों और जरूरत पड़ने पर मरीजों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
तरपाल में नाली और सीसी सड़क निर्माण अधूरा
ग्राम पंचायत तरपाल में भी विभिन्न मोहल्लों में नालियों और सीसी सड़कों की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, बायण माता मंदिर से जैन स्थानक और ढालावतों के मोहल्ले से प्रजापत परिवारों के घरों तक नालियों का निर्माण नहीं हुआ है। इसी प्रकार भोगर परिवार के मोहल्ले में भी नालियों का अभाव है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर विकास कार्य हुए, लेकिन दूसरे मोहल्ले लंबे समय से सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में भेदभाव की आशंका भी जताई है। उनका आरोप है कि जिस मोहल्ले में कांग्रेस का उम्मीदवार है, वहां कार्य करवाए गए, जबकि भाजपा समर्थित चयनित वार्ड पंच के मोहल्ले में विकास कार्य नहीं हुए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और पंचायत के विकास कार्यों में राजनीतिक विचारधारा के बजाय जरूरत और जनहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुएं में गिर रहा नालियों का पानी
तरपाल में पेयजल के एक कुएं में वर्षों से नालियों का पानी गिरने की समस्या भी बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या से पंचायत को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कुएं में गंदा पानी जाने का रास्ता बंद नहीं कराया गया। इससे पेयजल की स्वच्छता को लेकर चिंता बनी हुई है। गांव में कई स्थानों पर पुरानी सीसी सड़कें भी क्षतिग्रस्त हैं। सड़क की कंक्रीट उखड़ने से आवागमन में परेशानी होती है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार मरम्मत और नए निर्माण की मांग पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि घर-घर कचरा संग्रहण की सेवा बंद हो गई है। इससे गांव की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता, सड़क और जल निकासी जैसी सुविधाएं किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए आवश्यक हैं।
सुंदरवास में बंद हैंडपंप से बढ़ी परेशानी
सुंदरवास में करीब 20 परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में एक ही हैंडपंप है और वह भी बंद पड़ा है। पंचायत को कई बार समस्या बताने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। प्रकाश मेघवाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पंचायत में लिखित और मौखिक रूप से कई बार शिकायत की, लेकिन उन्हें चुनाव के बाद काम कराने की बात कही गई। उनका कहना है कि ग्रामीणों को पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
तरपाल निवासी मीठालाल टेलर, कालूलाल प्रजापत और हिमत भोगर ने भी सीसी सड़क और नालियों के निर्माण को लेकर पंचायत से कई बार संपर्क करने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार, समस्याओं के समाधान का भरोसा तो मिलता है, लेकिन कार्य पूरे नहीं होते। अब आचार संहिता का हवाला देकर भी काम टाले जाने की शिकायत की जा रही है।

सरपंच ने दिया कार्य कराने का आश्वासन
ग्राम पंचायत तरपाल के सरपंच खीमाराम गमेती ने स्वीकार किया कि गांव में नालियों का कार्य नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में नालियों का निर्माण कराया जाएगा। पेयजल के कुएं में नालियों का पानी गिरने की समस्या पर उन्होंने इसे बंद करवाने का आश्वासन दिया। सरपंच के अनुसार, सीसी सड़क सहित जो भी कार्य शेष हैं, उन्हें भी पूरा करवाया जाएगा।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान कब तक होता है। पंचायत चुनाव के समय विकास और जनसुविधाओं के मुद्दे फिर चर्चा में हैं। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि सड़क, पेयजल, नाली और पुलिया जैसी आवश्यक सुविधाओं को राजनीतिक भेदभाव से ऊपर रखकर प्राथमिकता दी जाए, ताकि गांवों में रहने वाले प्रत्येक परिवार को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।
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