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देशभर में मूसलाधार बारिश का कहर: बादल फटने, बाढ़ और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त*

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*देशभर में मूसलाधार बारिश का कहर: बादल फटने, बाढ़ और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त*

देश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन इसकी रफ्तार राहत के साथ-साथ भारी आफत भी लेकर आई है। उत्तर से लेकर पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत तक लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटनाएं, महाराष्ट्र में रिकॉर्ड वर्षा, मध्य प्रदेश में डूबते राजमार्ग, गुजरात के शहरों में जलभराव और केरल में भूस्खलन जैसी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मानसून कई राज्यों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मौसम विभाग लगातार चेतावनी जारी कर रहा है और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण हालात कई स्थानों पर गंभीर बने हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में बादल फटने की घटना ने लोगों को दहला दिया। ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बादल फटने से भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और चट्टानें रिहायशी इलाकों की ओर बह आईं। कई वाहन मलबे में दब गए और सड़कें बंद हो गईं। यातायात पूरी तरह बाधित हो गया तथा प्रशासन को राहत एवं बचाव दल भेजने पड़े। पड़ोसी किश्तवाड़ जिले में भी तेज बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए, जहां कई वाहन कीचड़ और पत्थरों के बीच फंस गए। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि पर्वतीय इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
महाराष्ट्र इस समय सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। मुंबई में पिछले 48 घंटों के दौरान लगभग 15 इंच वर्षा दर्ज की गई, जिससे शहर का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़कों पर जलभराव, लोकल ट्रेनों की धीमी रफ्तार और यातायात जाम ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। एहतियात के तौर पर मुंबई के सभी सरकारी और निजी स्कूलों तथा कॉलेजों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी। नासिक, ठाणे, पालघर और पुणे सहित कई जिलों में भी लगातार तेज बारिश हो रही है। नासिक में गोदावरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जबकि त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में पानी भर गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए त्र्यंबकेश्वर मंदिर और प्रसिद्ध सप्तश्रृंगी मंदिर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। ठाणे प्रशासन ने किलों, झरनों, झीलों, बांधों और नदियों के आसपास पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दी है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। पुणे-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर भूस्खलन के कारण बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिन्हें हटाने के लिए मशीनों की मदद लेनी पड़ी।
मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खजुराहो, बमीठा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण नेशनल हाईवे-39 पर तीन फीट तक पानी भर गया, जिससे यातायात घंटों प्रभावित रहा। प्रदेश के तीन दर्जन से अधिक जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई है और कई नदियां उफान पर हैं। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग टूटने की घटनाएं भी सामने आई हैं। कई स्थानों पर निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।
गुजरात के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में भी मानसून ने कहर बरपाया है। सूरत में पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शहर के अनेक निचले इलाके जलमग्न हो गए। सूरत-नवसारी स्टेट हाईवे पर पानी भरने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात की गति बेहद धीमी हो गई। मगदल्ला रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध सूरत के कई कपड़ा बाजारों में भी बारिश का पानी घुस गया, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रशासन ने शहर में रेड अलर्ट जारी कर लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
दक्षिण गुजरात के अलावा सौराष्ट्र और मध्य गुजरात के कई जिलों में भी लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। जूनागढ़ जिले में खेत पानी में डूब गए हैं और ग्रामीण इलाकों में कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। अनेक स्थानों पर मकानों को नुकसान पहुंचा है तथा पशुधन और कृषि को भी भारी क्षति पहुंचने की खबरें हैं। स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार वर्षा के कारण स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है।
केरल के वायनाड में भारी बारिश के बीच निर्माणाधीन सुरंग परियोजना के पास भूस्खलन होने से पांच लोग घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह घटना बताती है कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य कितने जोखिमपूर्ण हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में भी मानसून सक्रिय है। वाराणसी, प्रयागराज, चंदौली, बरेली सहित कई जिलों में तेज बारिश हुई है। पूरे प्रदेश के सभी जिलों के लिए वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। पीलीभीत में बारिश के कारण तालाब का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ रिहायशी इलाके में पहुंच गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। सहारनपुर में शाकंभरी नदी का जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन को लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी देनी पड़ी।
उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित अनेक राज्यों में भी भारी वर्षा का अलर्ट जारी है। राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, पाली, जालोर और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जबकि बिहार में मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भी भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण मानसून अत्यधिक सक्रिय बना हुआ है। कई स्थानों पर कम समय में अत्यधिक वर्षा होने के कारण बादल फटने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। जब नमी से भरे बादल पहाड़ों से टकराकर तेजी से ऊपर उठते हैं और बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में वर्षा कर देते हैं, तब ऐसी प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न होती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण भी अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे भविष्य में ऐसी परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
देशभर में उत्पन्न इस स्थिति ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केवल राहत कार्य ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक और वैज्ञानिक योजना भी आवश्यक है। शहरों में बेहतर जल निकासी व्यवस्था, नदियों और नालों की नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाना, पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा समय पर चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना समय की मांग है।
मानसून कृषि और जल संसाधनों के लिए जीवनदायिनी शक्ति है, लेकिन जब यही वर्षा अत्यधिक हो जाती है तो बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना और जलभराव जैसी घटनाएं व्यापक तबाही का कारण बनती हैं। फिलहाल देश के अनेक राज्यों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है और लोगों से सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की जा रही है। आने वाले दिनों में यदि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो कई राज्यों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    *कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*

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