नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9974940324 8955950335 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , पर्युषण पर्व 8 सितंबर से, तप-साधना और आत्मचिंतन में जुटेगा जैन समाज* – भारत दर्पण लाइव

पर्युषण पर्व 8 सितंबर से, तप-साधना और आत्मचिंतन में जुटेगा जैन समाज*

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

*पर्युषण पर्व 8 सितंबर से, तप-साधना और आत्मचिंतन में जुटेगा जैन समाज*
“धर्मसभा में संतों ने बताया पर्व का आध्यात्मिक महत्व, संवत्सरी पर होगी आत्मालोचना और क्षमायाचना”
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 6 सितम्बर 26
जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख आध्यात्मिक पर्व पर्युषण महापर्व 8 सितंबर से शुरू होगा। आठ दिवसीय इस पर्व को लेकर जैन समाज में तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्युषण के दौरान श्वेतांबर जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं तप, उपवास, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे। 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ पर्युषण का समापन होगा। संवत्सरी के दिन जैन समाजजन वर्षभर में जाने-अनजाने हुई भूलों और गलतियों के लिए आत्मालोचना करते हुए एक-दूसरे से क्षमायाचना करेंगे।
गोगुंदा के जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा में जिनेंद्र मुनि म सा ने पर्युषण पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण का विशेष अवसर है। इस दौरान व्यक्ति को कुछ समय के लिए बाहरी गतिविधियों से विराम लेकर अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तप, त्याग, उपवास, रात्रि एवं भोजन का त्याग, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और क्षमायाचना जैसे आध्यात्मिक कार्य आत्मशुद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुनि ने कहा कि मनुष्य की दृष्टि सामान्यतः बाहरी संसार को देखने में लगी रहती है, लेकिन जब यही दृष्टि भीतर की ओर मुड़ती है तो आत्मा के दर्शन होने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में वाणी का भी विशेष महत्व है। कड़वे वचनों में यदि मिठास और सद्भाव जुड़ जाए तो वही वाणी प्रवचन का रूप ले सकती है। मनुष्य के भीतर राग और द्वेष जैसी कषायें अशांति का प्रमुख कारण बनती हैं। जब तक इन कषायों का प्रभाव बना रहेगा, तब तक व्यक्ति पूर्ण सुख और शांति का अनुभव नहीं कर सकता। दुख और अशांति से मुक्ति के लिए शाश्वत सत्य का श्रवण, ज्ञान और सम्यक आचरण आवश्यक है।
धर्मसभा में साध्वी राजश्रीजी ने प्रभा अमृतवाणी के माध्यम से गुरु महिमा का वर्णन किया। उन्होंने गुरु के मार्गदर्शन को आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण बताते हुए श्रद्धा और समर्पण के भाव को समझाया। साध्वी सुलक्षणा प्रभाजी ने बड़ी साधु वंदना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जैन दर्शन में ज्ञान, दर्शन और चरित्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्मिक जीवन में इन तीनों का संतुलित विकास आवश्यक है।
पर्युषण पर्व के दौरान होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर चातुर्मास कार्यक्रम संयोजक सुंदरलाल मेहता ने समाज के श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक समय धार्मिक साधना में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्युषण आत्मकल्याण का अवसर है, इसलिए समाजजन समय पर स्थानक पहुंचकर प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनें। उन्होंने व्याख्यान के समय अपने प्रतिष्ठान और व्यवसाय बंद रखकर धर्म आराधना के लिए समय देने तथा अधिक से अधिक जप-तप करने का आग्रह किया।
धर्मसभा के समापन अवसर पर महाश्रमण जिनेंद्र मुनि म.सा. ने मंगल पाठ सुनाया। धर्मसभा में समाज के बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। पर्युषण पर्व को लेकर समाजजनों में उत्साह है और आगामी दिनों में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से पर्व की आराधना की जाएगी। पर्युषण के आठ दिनों में तप, संयम, आत्मचिंतन और क्षमाभाव के माध्यम से जीवन को अधिक सात्विक और शांत बनाने का संदेश दिया जाएगा।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031