टीकाकरण से वंचित बच्चों तक पहुंचे स्वास्थ्य सेवाएं धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका अहम
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टीकाकरण से वंचित बच्चों तक पहुंचे स्वास्थ्य सेवाएं धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका अहम
उदयपुर में जीरो डोज परियोजना के तहत आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित
छह ब्लॉक के 50 प्रभावशाली सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
कांतिलाल मांडोत
उदयपुर 9 अक्टूबर 26
बच्चों को जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने और नियमित टीकाकरण का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक पहुंचाने के लिए सामाजिक सहभागिता आवश्यक है। विशेष रूप से उन बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना महत्वपूर्ण है, जिन्हें अब तक टीकाकरण की एक भी खुराक नहीं मिली है। ऐसे बच्चों की पहचान करने, उनके परिवारों की शंकाओं का समाधान करने तथा टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों और समाज में प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ और अर्पण सेवा संस्थान के सहयोग से संचालित जीरो डोज परियोजना के अंतर्गत उदयपुर स्थित राजस्थान कृषि महाविद्यालय में आमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिले के छह ब्लॉक से आए 50 प्रभावशाली व्यक्तियों एवं सहयोगियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देना, टीकाकरण से वंचित बच्चों तक पहुंच बनाना तथा समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों और झिझक को दूर करने के लिए सामाजिक स्तर पर प्रभावी प्रयास करना रहा। कार्यक्रम के दौरान दृश्य-श्रव्य प्रस्तुतियों, चलचित्रों और आपसी चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों को जीरो डोज परियोजना की कार्यप्रणाली, टीकाकरण के महत्व और समुदाय में उनकी जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि टीकाकरण के प्रति संकोच रखने वाले परिवारों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग और समाज के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। कई बार परिवारों में जानकारी के अभाव, गलत धारणाओं अथवा अन्य सामाजिक कारणों से बच्चों का टीकाकरण समय पर नहीं हो पाता। ऐसे परिवारों को समझाने और उनका विश्वास जीतने में समाज के प्रभावशाली व्यक्ति महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। उन्होंने उपस्थित सहयोगियों से आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर सामाजिक व्यवहार परिवर्तन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
यूनिसेफ के राज्य स्तरीय प्रतिनिधि रियाद ने देश में स्वतंत्रता के बाद से टीकाकरण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने टीकाकरण को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि नियमित टीकाकरण बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीकाकरण का लाभ तभी व्यापक रूप से मिल सकता है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें सहयोग करे और किसी भी बच्चे को केवल जागरूकता की कमी या सामाजिक झिझक के कारण सुरक्षा से वंचित न रहना पड़े।
अर्पण सेवा संस्थान के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शुभकरण सिंह ने अतिथियों और विभिन्न ब्लॉक से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने नियमित टीकाकरण को मजबूत बनाने में समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच विश्वास और संवाद स्थापित करने वाले व्यक्ति परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। उनके सहयोग से टीकाकरण संबंधी संदेश गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाया जा सकता है।
संस्थान के महासचिव याशंकर शिवहरे ने भी प्रतिभागियों से टीकाकरण को लेकर समाज में व्याप्त शंकाओं के समाधान के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर संवाद जरूरी है। परिवारों को टीकाकरण के लाभ समझाकर और उनकी चिंताओं का उचित समाधान करके बच्चों को नियमित टीकाकरण से जोड़ने के प्रयास किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक जाहिद ने टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रभावशाली व्यक्तियों और सहयोगियों से अपेक्षित भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि समुदाय के बीच सक्रिय रहने वाले व्यक्तियों के सहयोग से टीकाकरण से वंचित बच्चों की पहचान करने और उनके परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
संस्थान की निदेशक प्रलेखन ज्योति पोखरियाल ने पंचायत स्तर पर महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जीरो डोज तथा ड्रॉप आउट की समस्या को कम करने के उपायों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को टीकाकरण की पहली खुराक नहीं मिली है, उनकी पहचान करने के साथ उन बच्चों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जिनका टीकाकरण बीच में छूट गया है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, धर्मगुरुओं और स्वास्थ्यकर्मियों को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
कार्यशाला में अर्पण सेवा संस्थान के लीलाधर पालीवाल, मेलडी मंदिर के महंत वीरम नाथ जी, प्यारनाथ जी महाराज और गोगुंदा के देवी सिंह सिसोदिया सहित बड़गांव, गोगुंदा, गिर्वा, झाड़ोल, कोटड़ा और मावली ब्लॉक के 50 प्रभावशाली सहयोगी उपस्थित रहे। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अपने-अपने गांवों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों में सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रभावशाली व्यक्तियों एवं सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उन्हें अपने-अपने गांवों में टीकाकरण से वंचित बच्चों की पहचान करने, उनके परिवारों को जागरूक करने तथा आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मियों के साथ समन्वय बनाकर काम करने की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रतिभागियों ने भविष्य में भी नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने और प्रत्येक पात्र बच्चे को टीकाकरण सेवाओं से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
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