*सूरत में नवरात्रि का रंगारंग उत्सव चरम पर गरबा की सातवीं रात गुजराती संस्कृति के रंग में रंगा मिनी भारत*
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*सूरत में नवरात्रि का रंगारंग उत्सव चरम पर गरबा की सातवीं रात गुजराती संस्कृति के रंग में रंगा मिनी भारत*
“माँ की आराधना में देर रात तक थिरके खैलेया महिलाओं और युवतियों में दिखा जबरदस्त उत्साह”
‘वराछा पूणा बॉम्बे मार्केट रोड पर गरबा रास की धूम सुरक्षा व्यवस्था के साथ सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल
कांतिलाल मांडोत
सूरत 18 अक्टूबर
गुजरात की शान और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक गरबा इन दिनों कपड़ा उद्योग की नगरी सूरत में पूरे शबाब पर है। मिनी भारत के नाम से पहचाने जाने वाले सूरत में नवरात्रि के सातवें दिन गरबा पंडालों, सोसायटियों और आयोजन स्थलों पर भक्ति, उल्लास और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। माँ दुर्गा की आराधना के साथ गुजराती संस्कृति की रंगीन छटा हर तरफ बिखरी नजर आई। पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी युवतियों, महिलाओं और युवाओं ने गुजराती भजनों तथा गरबा गीतों की धुन पर मन लगाकर नृत्य किया और नवरात्रि महोत्सव का भरपूर आनंद उठाया।
डायमंड नगरी सूरत में नवरात्रि केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, सांस्कृतिक एकता और सामूहिक उत्सव का भी बड़ा अवसर है। शहर में देश के विभिन्न राज्यों से आकर बसे लोग अपनी मेहनत और प्रतिभा से सूरत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। यही विविधता नवरात्रि के दौरान गरबा स्थलों पर भी दिखाई देती है। गुजरात की पारंपरिक संस्कृति से प्रभावित होकर दूसरे राज्यों के लोग भी गरबा रास में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। गुजराती भजनों की मधुर धुन पर कदम मिलाते लोग यह संदेश दे रहे हैं कि आस्था और संस्कृति की भाषा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सभी को एक सूत्र में जोड़ती है।

नवरात्रि के सातवें दिन शहर के विभिन्न इलाकों में गरबा आयोजनों की रौनक देखते ही बन रही थी। आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी, मधुर संगीत और पारंपरिक वेशभूषा ने उत्सव के माहौल को और भी मनमोहक बना दिया। गरबा खेलने आने वाले युवक-युवतियों का उत्साह ऐसा था कि लंबे समय तक नृत्य करने के बाद भी उनके चेहरों पर थकान के बजाय प्रसन्नता और उमंग दिखाई दे रही थी। कदमों की लय, तालियों की गूंज और संगीत की स्वर लहरियों के बीच हर कोई माँ की भक्ति में लीन नजर आया। एक सोसायटी से दूसरी सोसायटी तक गरबा खेलने जाने वाले खैलेया की अदाएं भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थीं।
सूरत में छोटे-बड़े अनेक गरबा आयोजन किए जा रहे हैं। कहीं सोसायटियों के खुले परिसर में सामूहिक गरबा हो रहा है, तो कहीं विशाल डोम बनाकर विशेष आयोजन किए गए हैं। बड़े गरबा डोम में प्रवेश के लिए टिकट व्यवस्था भी रखी गई है, जिसके माध्यम से लोग निर्धारित शुल्क देकर कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। इन आयोजनों में पारंपरिक गरबा के साथ आधुनिक संगीत और आकर्षक मंच सज्जा का मेल देखने को मिल रहा है। महिलाओं और युवतियों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन स्थलों की रौनक कई गुना बढ़ा दी है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन के साथ उत्साह में भी वृद्धि हो रही है और गरबा प्रेमियों को अगले दिन के आयोजन का इंतजार रहता है।
शहर के वराछा क्षेत्र में पूणा बॉम्बे मार्केट रोड पर भी गरबा महोत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। देश की आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सूरत के इस क्षेत्र में महिलाओं, युवतियों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गरबा रास के दौरान पारंपरिक संस्कृति के प्रति लगाव और सामूहिक सहभागिता स्पष्ट दिखाई दी। विभिन्न परिवारों के सदस्य एक साथ आयोजन में पहुंचे और माँ की आराधना करते हुए नृत्य का आनंद लिया। सोसायटी का वातावरण भक्तिमय संगीत, तालियों और गरबा की लय से गूंजता रहा। इस आयोजन ने स्थानीय लोगों को आपस में जुड़ने और त्योहार की खुशियां साझा करने का अवसर प्रदान किया।

नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं। श्रद्धालु इन दिनों पूजा-अर्चना के साथ अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गरबा इसी आस्था को सामूहिक उत्सव का रूप देता है। दीपों और रोशनी के बीच गोल घेरे में किया जाने वाला पारंपरिक नृत्य भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनाए रखता है। बदलते समय के साथ गरबा के आयोजन में आधुनिक व्यवस्थाएं जुड़ी हैं, लेकिन माँ के प्रति श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान आज भी इसकी मूल पहचान बने हुए हैं। सूरत में रहने वाले विभिन्न प्रदेशों के लोगों की भागीदारी इस परंपरा को और व्यापक बना रही है।
रात करीब एक बजे तक चलने वाले गरबा रास के दौरान महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा पुलिस प्रशासन के लिए विशेष प्राथमिकता बनी हुई है। देर रात तक कार्यक्रम चलने के कारण आयोजन स्थलों और आसपास की सड़कों पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे समय में पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है। गरबा खेलने के बाद घर लौटने वाली युवतियों तथा महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। पुलिस प्रशासन की सक्रियता से लोगों में सुरक्षा के प्रति भरोसा मजबूत होता है। नवरात्रि जैसे बड़े आयोजनों में पुलिस, आयोजकों और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय उत्सव को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गरबा आयोजन की सफलता में स्थानीय कार्यकर्ताओं और सोसायटी की व्यवस्था कार्यसमिति का योगदान भी उल्लेखनीय रहा।

लोकेशकुमार पुनमिया, गौतम रांका, मोहनलाल बाफना, हितेश, कांतिलाल दोषी, रमेश कोठारी, संतोष बाफना, मनजी काका, शरद भाई और रामानुज सहित अन्य सहयोगियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में पूरा सहयोग दिया और लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सामूहिक सहयोग से गरबा खेलने आने वाले लोगों को उत्सव में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। आयोजन से जुड़े लोगों का प्रयास है कि नवरात्रि के सभी दिनों में धार्मिक उत्साह, सामाजिक सद्भाव और अनुशासन का वातावरण बना रहे।
सूरत की पहचान केवल हीरा और कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की जीवंत संस्कृति, सामाजिक एकता और त्योहारों के प्रति लोगों का उत्साह भी शहर को विशिष्ट बनाता है। नवरात्रि के सातवें दिन गरबा रास में उमड़ा उल्लास इसी पहचान को मजबूत करता दिखाई दिया। माँ की आराधना, गुजराती संस्कृति की परंपरा और विभिन्न राज्यों से आए लोगों की सहभागिता ने आयोजन को यादगार बनाया। नवरात्रि के शेष दिनों में भी गरबा का उत्साह इसी तरह बना रहने की उम्मीद है। सूरत की धरती पर गूंजती गरबा की धुनें यही संदेश दे रही हैं कि आस्था, आनंद और आपसी सद्भाव मिलकर त्योहारों को जीवन की खुशियों से भर देते हैं।
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