जलवंत टाउनशिप में 21 वर्षों से गूंज रही गरबा की रमझट दुर्गा अष्टमी पर पूजा अर्चना के बाद बच्चों को किया पुरस्कृत*
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*जलवंत टाउनशिप में 21 वर्षों से गूंज रही गरबा की रमझट दुर्गा अष्टमी पर पूजा अर्चना के बाद बच्चों को किया पुरस्कृत*
कांतिलाल मांडोत
सूरत 20 अक्टूबर 26
गुजरात की सांस्कृतिक पहचान गरबा आज केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। मां दुर्गा की आराधना के साथ मनाया जाने वाला नवरात्रि महोत्सव लोगों को धर्म और संस्कृति से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इसी धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक परंपरा की अनूठी झलक सूरत के पूणा बॉम्बे मार्केट रोड स्थित जलवंत टाउनशिप में देखने को मिली, जहां पिछले 21 वर्षों से गरबा महोत्सव निरंतर आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी नवरात्रि के दौरान टाउनशिप में गरबा की रमझट के बीच बच्चों, युवाओं, महिलाओं और युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मां दुर्गा की आराधना, पारंपरिक गरबा और डांडिया रास के साथ नौ दिनों तक चले इस उत्सव में श्रद्धा और उल्लास का सुंदर संगम देखने को मिला। दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया।

नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना में लीन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के पश्चात गरबा खेलने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पुरस्कार वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। गरबा महोत्सव में बच्चों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया, क्योंकि सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अहम है। जलवंत टाउनशिप के अध्यक्ष जयसुख भाई हिरपरा ने गरबा आयोजन में भाग लेने पहुंचे बच्चों को पुरस्कार स्वरूप लिफाफे भेंट किए। उनके इस प्रोत्साहन से बच्चों में उत्साह का संचार हुआ। इसके साथ ही रेखा बहन चौधरी ने भी बच्चों को पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साह बढ़ाया। गौतम रांका ने भी नवरात्रि के पावन अवसर पर बच्चों को पारितोषिक प्रदान किए। पुरस्कार वितरण का उद्देश्य बच्चों को केवल उपहार देना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामूहिक आयोजनों से जोड़कर उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी रहा।

इस प्रकार गरबा महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठान के साथ बच्चों के सम्मान और प्रोत्साहन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। जलवंत टाउनशिप में गरबा का आयोजन पिछले 21 वर्षों से लगातार होता आ रहा है। दो दशक से अधिक समय से जारी यह परंपरा अब टाउनशिप की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। प्रत्येक वर्ष उत्सव समिति की ओर से गरबा महोत्सव को भव्य रूप देने के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं। आयोजन में स्थानीय निवासियों के साथ बच्चों और युवाओं की भागीदारी उत्सव की रौनक बढ़ाती है। मां दुर्गा की आराधना के बाद पारंपरिक धुनों पर गरबा खेलने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों के कदम जब गरबा की लय पर थिरकते हैं, तो पूरा परिसर उत्साह और उमंग से भर उठता है। इस आयोजन की विशेषता महिलाओं और युवतियों की बढ़-चढ़कर भागीदारी रही। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और युवतियों ने गरबा के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति लगाव प्रदर्शित किया। युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ गरबा खेलकर नवरात्रि के उल्लास को बढ़ाया। बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया। यहां विभिन्न आयु वर्ग के लोग एक साथ गरबा खेलते हुए दिखाई दिए, जिससे सामाजिक मेलजोल और आपसी सद्भाव की भावना मजबूत हुई। आज के बदलते दौर में जब नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे आयोजन उसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गरबा के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ अनुशासन, सामूहिकता और परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश भी मिलता है। जलवंत टाउनशिप की उत्सव समिति की ओर से गरबा खेलने आने वाले प्रतिभागियों के लिए जलपान की विशेष व्यवस्था की जाती है। आयोजकों की ओर से प्रत्येक दिन दो बार जलपान उपलब्ध कराया जाता है, जिससे गरबा खेलने आने वाले लोगों को सुविधा मिलती है। लंबे समय तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिभागियों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना समिति की व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार 21 वर्षों से आयोजन को सुचारु रूप से जारी रखना समिति की सक्रियता, स्थानीय निवासियों के सहयोग और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति समर्पण को दर्शाता है। गरबा महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने वाला उत्सव भी है। ऐसे आयोजनों में लोग अपने दैनिक कार्यों से समय निकालकर परिवार और समाज के साथ धार्मिक उल्लास में सहभागी बनते हैं। बच्चों को पुरस्कार देकर उनका सम्मान करना इस परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक पहल है। जलवंत टाउनशिप में दुर्गा अष्टमी पर पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और पुरस्कार वितरण के साथ नवरात्रि महोत्सव ने श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बनाया। 21 वर्षों से चली आ रही गरबा परंपरा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संस्कृति तभी जीवंत रहती है, जब नई पीढ़ी उससे जुड़कर उसे आगे बढ़ाती है। मां दुर्गा की भक्ति, महिलाओं और युवतियों की सक्रिय भागीदारी, युवाओं का उत्साह तथा बच्चों को प्रोत्साहन इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं। जलवंत टाउनशिप का यह गरबा महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।
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