मानव सेवा की उज्ज्वल परंपरा बनता गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान का निःशुल्क नेत्र चिकित्सा अभियान*
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*मानव सेवा की उज्ज्वल परंपरा बनता गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान का निःशुल्क नेत्र चिकित्सा अभियान*
कांतिलाल मांडोत
गोगुन्दा 11 जुलाई 2026
समाज की वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक समृद्धि में नहीं बल्कि सेवा और संवेदनशीलता में निहित होती है। जब समाज के लोग बिना किसी स्वार्थ के पीड़ित और जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशियों की रोशनी फैलाने के लिए आगे आते हैं तब सेवा एक आंदोलन का रूप ले लेती है। श्री गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान द्वारा वर्षों से संचालित निःशुल्क नेत्र चिकित्सा अभियान इसी सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। यह अभियान केवल आँखों की जाँच या मोतियाबिंद के ऑपरेशन तक सीमित नहीं है बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और नया विश्वास जगाने का माध्यम बन चुका है।
हाल ही में श्री गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान के जसवंतगढ़ केंद्र पर आयोजित निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर में 160 मरीजों की आँखों की जाँच की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा की गई जाँच में 19 मरीजों में मोतियाबिंद की पहचान हुई जिनका सफलतापूर्वक निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। शिविर के दौरान लगभग 120 जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके। इस शिविर ने एक बार फिर यह साबित किया कि समाज के सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं को हर जरूरतमंद तक पहुँचाया जा सकता है।
श्री गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान वर्ष 2012 से निरंतर नेत्र सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब तक लगभग 4600 से अधिक जरूरतमंद मरीजों के निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए जा चुके हैं। इन ऑपरेशनों ने हजारों लोगों के जीवन में फिर से उजाला लौटाया है। जिन लोगों ने वर्षों तक धुंधली दुनिया देखी थी वे आज अपने परिवार को साफ देख पा रहे हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह उपलब्धि केवल एक संस्था की नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक सेवा भावना का परिणाम है।
पाली जिले के विसलपुर में प्रत्येक माह की दस तारीख को आयोजित होने वाला निःशुल्क नेत्र जांच शिविर भी सेवा का एक प्रेरणादायक केंद्र बन चुका है। शिविर में जिन मरीजों में मोतियाबिंद की पहचान होती है उन्हें पूरी व्यवस्था के साथ ऑपरेशन के लिए विसलपुर ले जाया जाता है। मरीजों और उनके साथ आने वाले सहयोगी के लिए आने जाने की व्यवस्था से लेकर परामर्श ऑपरेशन भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पूरा खर्च श्री गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान द्वारा वहन किया जाता है। इस प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को किसी प्रकार की चिंता किए बिना उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला पाँच दिवसीय नेत्र चिकित्सा शिविर सेवा और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। जब पूरा समाज उत्सव मनाने में व्यस्त होता है तब सेवा के लिए समर्पित लोग जरूरतमंदों की आँखों में रोशनी लौटाने का कार्य करते हैं। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है कि हमारे पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि परोपकार और मानवता के संदेश भी देते हैं।
इस महान सेवा अभियान की सफलता के पीछे समाज के दानदाताओं का अमूल्य योगदान है। अनेक भामाशाह बिना किसी प्रचार और अपेक्षा के नियमित रूप से आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं ताकि कोई भी जरूरतमंद उपचार से वंचित न रहे। उनका यह योगदान वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जिन हाथों से दान निकलता है वे केवल किसी एक व्यक्ति की सहायता नहीं करते बल्कि पूरे समाज में मानवता और करुणा की भावना को मजबूत बनाते हैं।
इसके साथ ही उन सभी अवैतनिक सेवाभावी कार्यकर्ताओं का योगदान भी अत्यंत सराहनीय है जो अपना समय श्रम और ऊर्जा बिना किसी पारिश्रमिक के इस सेवा कार्य में समर्पित करते हैं। शिविर की व्यवस्थाओं से लेकर मरीजों के पंजीयन मार्गदर्शन परिवहन और देखभाल तक अनेक स्वयंसेवक पूरी निष्ठा से कार्य करते हैं। उनका समर्पण इस बात का प्रमाण है कि सेवा केवल धन से नहीं बल्कि समय और श्रम के दान से भी की जा सकती है। ऐसे सभी सेवाभावियों के प्रति समाज सदैव कृतज्ञ रहेगा।
चिकित्सकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से वे मरीजों को नई दृष्टि प्रदान करते हैं। चिकित्सा दल का समर्पण और संवेदनशील व्यवहार मरीजों के मन में विश्वास पैदा करता है। यह सेवा केवल एक चिकित्सकीय कार्य नहीं बल्कि मानवता की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति बन जाती है।
जैन समाज ने सदैव सेवा परंपरा को अपने जीवन का आधार बनाया है। शिक्षा स्वास्थ्य गौसेवा जलसेवा और मानव सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में समाज का योगदान अनुकरणीय रहा है। गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचा रहा है। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इस सेवा अभियान से जुड़े। कोई आर्थिक सहयोग दे सकता है तो कोई श्रमदान कर सकता है और कोई जरूरतमंद मरीजों तक इस सेवा की जानकारी पहुँचा सकता है। जब समाज का हर वर्ग इस प्रकार के जनहित कार्यों में सहभागी बनेगा तब सेवा का यह दीपक और अधिक प्रकाश फैलाएगा।
श्री गुरु पुष्कर जैन सेवा संस्थान का यह निःशुल्क नेत्र चिकित्सा अभियान वास्तव में मानव सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संस्था से जुड़े सभी पदाधिकारी चिकित्सक स्वयंसेवक दानदाता और समाज के प्रत्येक सहयोगी बधाई और सम्मान के पात्र हैं। उनके निस्वार्थ प्रयासों ने हजारों लोगों के जीवन में फिर से रोशनी लौटाई है। यही सच्ची सेवा है यही सच्चा धर्म है और यही वह प्रेरणा है जो समाज को अधिक संवेदनशील अधिक जागरूक और अधिक मानवीय बनाती है। “मानव सेवा ही सच्ची सेवा” का यह संकल्प आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ता रहे यही पूरे समाज की मंगलकामना है।
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