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रक्षाबंधन पर्व पर धर्मसभा में गूंजा संयम और सदाचार का संदेश*

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*रक्षाबंधन पर्व पर धर्मसभा में गूंजा संयम और सदाचार का संदेश*
“साधु-साध्वियों ने पर्व की धार्मिक महत्ता बताई, पर्यूषण पर्व में धर्म आराधना से जुड़ने का किया आह्वान”

कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा28 अगस्त
कस्बे के ब्रह्मपुरी स्थित वर्धमान स्थानकवासी जैन स्थानक में शुक्रवार को आध्यात्मिक चातुर्मास के तहत रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में साधु-साध्वियों ने रक्षाबंधन पर्व की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को संयम, सदाचार, आत्मशुद्धि और धर्म की राह पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर साधु-साध्वियों के प्रवचनों का लाभ लिया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए महाश्रमण पूज्य गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व ही नहीं, बल्कि इसके पीछे प्रेम, विश्वास, त्याग, सद्भाव और आत्मिक शुद्धि की भावना भी जुड़ी हुई है। रक्षा सूत्र हमें अपने जीवन में सद्गुणों की रक्षा करने तथा बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि पर्व और त्योहार तभी सार्थक हैं, जब उनके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करे।
उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में संयम और सदाचार को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। धर्म का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के आचरण और विचारों में शुद्धता लाना है। मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न देना तथा सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ना ही धर्म की सार्थकता है।
साध्वी राजश्री जी ने रक्षाबंधन से जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी देते हुए भगवान कृष्ण और द्रौपदी से संबंधित प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व प्रेम, विश्वास और संरक्षण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को आगामी पर्यूषण पर्व के दौरान अधिक से अधिक धर्म आराधना करने के लिए प्रेरित किया। साध्वी ने अखंड नवकार जाप एवं सामूहिक तेल नवकार जाप में श्रद्धालुओं से सहभागी बनने का आह्वान किया।
साध्वी सुलक्षणा प्रभा ने शास्त्र ज्ञान, आगम अध्ययन और साधु वंदना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और संतों के सान्निध्य से व्यक्ति को जीवन जीने की सही दिशा मिलती है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से नियमित धर्म आराधना करने तथा चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाली आध्यात्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।
धर्मसभा के संयोजक सुंदरलाल मेहता ने बाहर से आए अतिथियों एवं धर्मप्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान नियमित प्रवचन, नवकार महामंत्र जाप सहित अनेक आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्म आराधना में सहभागिता निभाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान धर्मसभा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक साधु-साध्वियों के प्रवचन सुने और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। इस अवसर पर तेरापंथ सभा के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर महाश्रमण पूज्य गुरुदेव जिनेन्द्र मुनि ने मंगल पाठ सुनाया। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को धर्ममय, संयमित एवं सदाचारी जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं दीं। धर्मसभा का समापन श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ।

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