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सूरत में गरबा संस्कृति का उमड़ा उल्लास माँ अम्बे की आराधना में देर रात तक झूम रहे युवा*

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*सूरत में गरबा संस्कृति का उमड़ा उल्लास माँ अम्बे की आराधना में देर रात तक झूम रहे युवा*

जलवंत टाउनशिप में गरबा और डांडिया रास की धूम

गौतम रांका ने बताया नौ दिन तक घर-घर से गरबा खेलने पहुंचते हैं श्रद्धालु

कांतिलाल मांडोत
सूरत 15 अक्टूबर 26
सूरत में इन दिनों नवरात्रि की भक्ति और गरबा संस्कृति का अनूठा रंग देखने को मिल रहा है। माँ अम्बे की आराधना और आरती के बाद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गरबा और डांडिया रास की धूम मची हुई है। मंदिरों, सोसायटियों, अपार्टमेंटों और सार्वजनिक प्रांगणों में माता की भक्ति के साथ पारंपरिक गरबा संस्कृति जीवंत हो उठी है। महिलाएं, युवतियां और पुरुष पूरे उत्साह के साथ गरबा खेल रहे हैं। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे प्रतिभागियों के कदम ढोल की थाप और संगीत की धुन पर देर रात तक थिरकते नजर आ रहे हैं। नवरात्रि के अवसर पर सूरत का वातावरण भक्तिमय होने के साथ उत्सव के रंग में रंग गया है। माँ अम्बे के जयकारों, आरती की गूंज और गरबा गीतों से शहर के विभिन्न क्षेत्र गुलजार हैं। नवरात्रि केवल गुजरात का प्रमुख पर्व नहीं है, बल्कि देशभर में माता की आराधना, श्रद्धा और शक्ति की उपासना का विशेष अवसर है। गुजरात में इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान और गरबा की परंपरा का विशेष महत्व है। यहां गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। यही कारण है कि हर वर्ष नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में युवाओं का उत्साह देखते ही बनता है।

सूरत में गरबा आयोजनों की खासियत यह है कि इनमें पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक उत्सव का सुंदर संगम दिखाई देता है। महिलाएं और युवतियां आकर्षक पारंपरिक परिधानों में सजकर गरबा खेलने पहुंचती हैं। पुरुष वर्ग भी पूरे उत्साह के साथ डांडिया रास में भाग लेता है। ढोल की थाप, संगीत की लय और तालियों की गूंज के बीच जब प्रतिभागी गोल घेरे में गरबा करते हैं, तो पूरा वातावरण उत्साह से भर उठता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में श्रद्धालु प्रतिदिन माँ अम्बे की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि के प्रति युवाओं का आकर्षण विशेष रूप से दिखाई दे रहा है। मित्रों और परिवारों के साथ बड़ी संख्या में लोग गरबा स्थलों पर पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर देर रात एक बजे तक गरबा खेलने का उत्साह बना रहता है। माता की आराधना के साथ पारंपरिक लोकनृत्य का आनंद लेने के लिए हर आयु वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। गरबा आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को गुजरात की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।

त्रिकमनगर स्थित पूणा बॉम्बे मार्केट रोड के जलवंत टाउनशिप में भी नवरात्रि के दौरान गरबा का विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। टाउनशिप के विशाल प्रांगण में महिलाएं, युवतियां और युवा बड़ी संख्या में एकत्रित होकर गरबा और डांडिया रास का आनंद ले रहे हैं। माँ अम्बे की आरती के बाद जैसे ही गरबा की धुन शुरू होती है, पूरा प्रांगण उल्लास और उमंग से भर जाता है। आकर्षक परिधानों में सजे प्रतिभागी पारंपरिक गरबा की लय पर कदम मिलाते हुए माता की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं।

यहां गरबा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि टाउनशिप के निवासियों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला सामाजिक उत्सव भी बन गया है। परिवारों के साथ लोग आयोजन में पहुंचते हैं और सामूहिक रूप से नवरात्रि का आनंद लेते हैं। महिलाओं और युवतियों की भागीदारी से आयोजन की रौनक बढ़ रही है। महिला मंडल की बहनें भी पूरे उत्साह के साथ गरबा खेलकर माता की आराधना कर रही हैं। जैन समाज के युवाओं ने भी गरबा आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। विभिन्न समाजों के लोगों की सहभागिता से धार्मिक सद्भाव, सामाजिक समरसता और आपसी मेलजोल का संदेश मिल रहा है।

जलवंत टाउनशिप में नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर निवासियों में खासा उत्साह है। गरबा खेलने के लिए घरों से परिवारों और मित्रों के साथ लोग पहुंच रहे हैं। आयोजन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई है। अपार्टमेंटों और मोहल्लों में रहने वाले लोग मिलकर इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हैं। कई स्थानों पर गरबा खेलने आने वाले लोगों के लिए जलपान और अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध किया जाता है, जिससे देर रात तक चलने वाले कार्यक्रम में शामिल लोगों को सुविधा मिल सके। इस प्रकार नवरात्रि का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामुदायिक सहभागिता का भी उदाहरण बन रहा है। टाउनशिप के प्रांगण में गरबा की धुन के साथ लोगों का उत्साह लगातार बना हुआ है। आयोजन में शामिल महिलाएं और युवतियां पारंपरिक नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।

वहीं युवा वर्ग भी गरबा की परंपरा को नई ऊर्जा के साथ अपना रहा है। नौ दिनों तक चलने वाला यह उत्सव लोगों को रोजमर्रा की व्यस्तता से अलग होकर परिवार, समाज और संस्कृति के साथ समय बिताने का अवसर प्रदान करता है।
आयोजन से जुड़े गौतम रांका ने बताया कि जलवंत टाउनशिप में नौ दिनों तक गरबा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान घरों से बड़ी संख्या में खेलैया गरबा खेलने के लिए पहुंचते हैं। सभी लोग मिलकर माता की आराधना करते हैं और गरबा की पारंपरिक संस्कृति का आनंद लेते हैं। आयोजन में आने वाले लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई है, ताकि सभी प्रतिभागियों को सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि टाउनशिप के निवासी सामूहिक रूप से इस उत्सव में सहयोग करते हैं और प्रत्येक वर्ष नवरात्रि को उत्साह के साथ मनाने का प्रयास किया जाता है। जलवंत टाउनशिप के चेयरमेन जयसुख भाई का आयोजन में विशेष योगदान रहता है।

उनके सहयोग से आयोजन को व्यवस्थित और उत्साहपूर्ण बनाने में मदद मिलती है। टाउनशिप के निवासियों की सहभागिता इस उत्सव को और भी खास बना देती है। गरबा के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आते हैं और माता की भक्ति में शामिल होते हैं।

सूरत में नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों की बढ़ती रौनक के साथ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस सतर्क है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई गई है। प्रमुख चौराहों और गरबा स्थलों के आसपास पुलिस की निगरानी रखी जा रही है, ताकि महिलाएं और युवतियां सुरक्षित वातावरण में आयोजन का आनंद ले सकें। देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस की सक्रियता से परिवारों को भी गरबा आयोजनों में भाग लेने का भरोसा मिलता है। सार्वजनिक आयोजनों में व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस की मौजूदगी महत्वपूर्ण है। आयोजकों और स्थानीय निवासियों की जिम्मेदारी भी है कि वे सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करें और सभी के लिए उत्सव का वातावरण बनाए रखें।
नवरात्रि के नौ दिन सूरत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। माँ अम्बे की आराधना, पारंपरिक गरबा, डांडिया रास और सामूहिक सहभागिता से शहर का हर क्षेत्र उत्सवमय दिखाई दे रहा है। जलवंत टाउनशिप में युवाओं, महिलाओं, युवतियों और जैन समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि गरबा संस्कृति समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। परंपरा के प्रति सम्मान, माता के प्रति श्रद्धा और सामूहिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रहा है। नौ दिनों तक चलने वाली गरबा आराधना में हर दिन भक्ति, उल्लास और सामाजिक एकता का नया रंग देखने को मिल रहा है।

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