वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में स्वर, उच्चारण और भाव की शुद्धता का अभ्यास*
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*वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में स्वर, उच्चारण और भाव की शुद्धता का अभ्यास*
कांतिलाल मांडोत
उदयपुर 16 अगस्त
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर एवं राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम् गीत रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने उपलक्ष्य में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् गायन की कार्यशाला का आयोजन गुरुवार को महाविद्यालय में किया गया। कार्यशाला में छात्राओं एवं कार्मिकों को सामूहिक गायन के विभिन्न पहलुओं का अभ्यास करवाया गया।
कार्यशाला में शब्दों के शुद्ध उच्चारण, गायन की लय, उचित स्वर स्तर एवं उतार-चढ़ाव, पंक्तियों के बीच आवश्यक अंतराल तथा शब्दों के भाव से जुड़कर गायन करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
संगीतकार प्रेम भण्डारी ने पहले वंदे मातरम् की पंक्तियों का गायन किया तथा छात्राओं एवं कार्मिकों ने उनके साथ पंक्तियों को दोहराते हुए अभ्यास किया। संपूर्ण वंदे मातरम् के अंतरों का बार-बार अभ्यास करवाया गया तथा गायन में आवश्यक सुधार के लिए संगीतकार द्वारा निर्देश दिए गए।
कार्यशाला के प्रारंभ में प्राचार्य प्रो. अंजना गौतम ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के उपनिदेशक पवन अमरावत, वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. लाजवंती बनावत, प्रो. श्याम कुमावत, प्रो. अशोक सोनी, प्रो राम सिंह भाटी सहित अनेक संकाय सदस्य व छात्राएं उपस्थित रही। सांस्कृतिक प्रभारी प्रो. नूतन कवितकर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ स्नेहा बाबेल ने किया।
कार्यशाला का समापन सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ। जिसमें प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट स्वर, शुद्ध उच्चारण, भावपूर्ण प्रस्तुति एवं सामूहिकता के साथ गुणवत्तापूर्ण गायन किया l
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