पाकिस्तान को ओआईसी की बैठक में मुह की खानी पड़ी*
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*पाकिस्तान को ओआईसी की बैठक में मुह की खानी पड़ी*
आतंकवाद पर दुनिया का कोई भी देश किसी भी देश का समर्थन नही करता है।आतंकवाद विश्वव्यापी बन गया है।यह जहरीला फोड़ा है जो दिनों दिन नासूर की शक्ल में हैवानियत भरा कार्य कर रहा है।पाकिस्तान को ओआईसी की बैठक में मुह की खानी पड़ी।पाकिस्तान हमेशा अपनी हेकड़ी और अहंकार के लिए जाने जाता है।लिहाजा, उसकी कथनी और करनी में समानता नही है।पाकिस्तान ने हवाई हमले पर कई बार पाकिस्तान की जीत का दावा कर चुका है।अपनी आवाम को खुश करने के लिए हमेशा जुठ का सहारा लेता है। भारत और इंडोनेशिया के अच्छे रिश्ते है।गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति अतिथि थे।भारत ने इनकार करने के बाद उन्होंने पाकिस्तान का दौरा भी रद्द कर दिया था।तीन मुस्लिम देशों ने भारत के खिलाफ प्रस्ताव को रोका था।इंडोनेशिया भी ओआईसी की बैठक में शामिल था।इंडोनेशिया मिस्र और बहरीन ने मिलकर भारत के खिलाफ प्रस्ताव को रोक दिया है।भारत के खिलाफ कोई देश नही बोलता है।क्योंकि विश्व समुदाय को भारत पर भरोसा है।भारत कहता है,वह करता है।दरअसल ,जकार्ता में ओआईसी की बैठक में पाकिस्तान चाहता था कि कश्मीर मुद्दे पर भारत को घेरा जाए, लेकिन उनको मुह की खानी पड़ी।भारत के लिए डिप्लोमेटिक कामयाबी है।इससे जाहिर है कि इस्लामिक देशों में पाकिस्तान की साख नही है।पाकिस्तान के भारत विरोधी एजेंडे की हवा निकलती दिखाई दी है।कश्मीर पर पाकिस्तान का एजेंटा नाकाम हो गया।पाकिस्तान अब भी कश्मीर का राग अलाप रहा है।जबकि पीओके को खाली करने का भारत ने अल्टीमेटम दे दिया है।फिर भी पाकिस्तान नकक कटा है।वो बेशर्म देश है।उनके यहां कानून व्यवस्था का गड़बड़झाला हर हमेशा अल्पसंख्यक समुदाय के लिए गले की फांस बना हुआ है।इंडोनेशिया बहरीन और मिस्र के साथ भारत के अच्छे राजनयिक सम्बन्ध है।इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की सोच रहा है।मिस्र रक्षा निवेश और कनेक्टिविटी संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।पाकिस्तान ने इन देशों से गुहार लगाकर कश्मीर के लिए भारत को घेरने की कोशिश की गई,लेकिन इन मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान को एक झटके में अपनी जगह बता दी।पाकिस्तान को अब समझ जाना चाहिए कि कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है।इंडोनेशिया के विचार भारत के विचारों से काफी मिलते है।आतंकवाद के लिए भारत जीरो टॉलरेंस पर कार्य कर रहा है तो इंडोनेशिया भी ऐसा ही सोचता है।हमे मन लगाकर आतंकियों की लुटिया डुबोने के लिए मेहनत करनी चाहिए।संगठन को तोड़ने से ही संगठन को भेदा जा सकता है।

*कांतिलाल मांडोत*
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