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आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान सूरत से विकास और रक्षा शक्ति का बड़ा संदेश*

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*आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान सूरत से विकास और रक्षा शक्ति का बड़ा संदेश*

5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा केवल विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की बढ़ती ताकत का भी प्रतीक बनकर सामने आया। सूरत में आयोजित विशाल कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने लगभग 18,800 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को देश के भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जो राष्ट्र दूसरों पर निर्भर रहते हैं, वे कभी विकसित नहीं बन सकते। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ निराशावादी लोग आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन आज भारत अपनी क्षमता और सामर्थ्य के दम पर दुनिया में नई पहचान बना रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सूरत की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि यह शहर केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि एक जीवंत भावना है। स्वच्छता, उद्योग, व्यापार और नवाचार के क्षेत्र में सूरत ने पूरे देश के लिए एक आदर्श स्थापित किया है। लगातार स्वच्छता पुरस्कार जीतने वाला यह शहर विकास और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। उन्होंने कहा कि गुजरात और विशेष रूप से सूरत ने भारत की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और भी बढ़ने वाली है।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक संकटों का सामना किया है। कोरोना महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया था और अब तेल, गैस तथा ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां कई देशों के सामने खड़ी हैं। ऐसे कठिन समय में भारत ने अपनी जनता और संसाधनों के बल पर मजबूती से मुकाबला किया है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति ने देश को इन संकटों से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सूरत दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित हिस्सा प्रधानमंत्री का लार्सन एंड टुब्रो के आर्म्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स का दौरा रहा। यहां उन्होंने भारत में निर्मित आधुनिक टैंक, ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरणों का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री ने रक्षा विशेषज्ञों और कंपनी अधिकारियों से इन अत्याधुनिक प्रणालियों की तकनीकी जानकारी प्राप्त की। यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति का प्रदर्शन भी था।
लार्सन एंड टुब्रो का यह रक्षा निर्माण केंद्र भारत के सबसे आधुनिक रक्षा उत्पादन परिसरों में गिना जाता है। यहां सेना के लिए बख्तरबंद वाहन, तोप प्रणालियां, सैन्य प्लेटफॉर्म और अनेक अत्याधुनिक उपकरणों का निर्माण, संयोजन और परीक्षण किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री का यह दौरा उसी रणनीति की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से दिखाई दिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजन में आने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को साइकिल तथा इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। आम नागरिकों की सुविधा के लिए सूरत नगर निगम ने 450 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी स्वयं अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों के साथ लगभग साढ़े पांच किलोमीटर साइकिल चलाकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई।
प्रधानमंत्री ने सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक विकास से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य गुजरात के औद्योगिक ढांचे को और मजबूत करना तथा क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाना है। उन्होंने वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के दो महत्वपूर्ण पैकेजों का उद्घाटन किया। इसके अलावा अनेक बड़े और छोटे पुल, रेलवे ओवरब्रिज, फ्लाईओवर तथा लगभग 70 अंडरपास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की लगभग 4,732 करोड़ रुपए की चार नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी इस अवसर पर किया गया। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग-56 पर धामासिया से बिटाडा तक चार लेन सड़क निर्माण, नसरपोर से मलोथा तक चार लेन मार्ग का विकास, रिलायंस क्षेत्र के निकट छह लेन वाहन अंडरपास तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-53 के सूरत-हजीरा खंड पर कावास में वाहन अंडरपास सह फ्लाईओवर का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ यातायात सुगम होगा और व्यापारिक परिवहन की लागत में भी कमी आएगी।
सूरत कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने दमन से लक्षद्वीप के लिए लगभग 885 करोड़ रुपए की बंदरगाह और पर्यटन परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य द्वीपीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है। केंद्र सरकार का मानना है कि बेहतर बंदरगाह और पर्यटन अवसंरचना लक्षद्वीप को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि भारत आज जिस गति से विकास कर रहा है, उसके पीछे आत्मविश्वास, नवाचार और आत्मनिर्भरता की भावना है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की क्षमताओं पर संदेह करते हैं और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों का उपहास उड़ाते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि देश आज रक्षा, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम बनेगा।
सूरत का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। एक ओर जहां हजारों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं ने गुजरात के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर स्वदेशी रक्षा उत्पादन केंद्र का दौरा आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन बनकर सामने आया। पर्यावरण संरक्षण, हरित परिवहन, आधुनिक आधारभूत संरचना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों को एक साथ जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि विकसित भारत का मार्ग आत्मनिर्भरता, नवाचार और जनभागीदारी से होकर गुजरता है। 5 जून का यह दौरा केवल परियोजनाओं के उद्घाटन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा और विकास की व्यापक सोच का भी एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन साबित हुआ।

      कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार

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