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जनता के दिलों में बसने वाले पुलिस आयुक्त : अनुपम सिंह गहलोत की यादगार विदाई*

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जनता के दिलों में बसने वाले पुलिस आयुक्त : अनुपम सिंह गहलोत की यादगार विदाई*

कुछ अधिकारी अपने पद के कारण पहचाने जाते हैं, जबकि कुछ अपनी कार्यशैली, व्यवहार और जनसेवा के कारण लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बना लेते हैं। 1997 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुपम सिंह गहलोत ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं। सूरत शहर के पुलिस आयुक्त के रूप में उनका कार्यकाल केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पुलिस और जनता के बीच विश्वास का ऐसा रिश्ता बनाया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी। अहमदाबाद के नए पुलिस आयुक्त के रूप में उनकी नियुक्ति निश्चित रूप से उनकी क्षमता, अनुभव और नेतृत्व का सम्मान है, लेकिन सूरत के लिए उनका जाना एक ऐसी कमी छोड़ गया है, जिसे आसानी से भरा नहीं जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश के मूल निवासी अनुपम सिंह गहलोत ने सिविल इंजीनियरिंग में बीई और एमटेक जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारतीय पुलिस सेवा को चुना। गुजरात में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और हर स्थान पर अपनी अलग पहचान बनाई। भावनगर और पाटन के पुलिस अधीक्षक से लेकर सीआईडी इंटेलिजेंस, राजकोट, वडोदरा और अंततः सूरत के पुलिस आयुक्त तक का उनका सफर उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और ईमानदार कार्यशैली का प्रमाण रहा है। यही कारण है कि उन्हें वर्ष 2013 में ‘पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस’ से भी सम्मानित किया गया।

सूरत जैसे तेजी से विकसित होते महानगर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। देश-विदेश के लाखों लोगों का यह शहर व्यापार, उद्योग और हीरा-टेक्सटाइल कारोबार का प्रमुख केंद्र है। यहां बढ़ती आबादी, यातायात, संगठित अपराध और सामाजिक विविधता के बीच प्रभावी पुलिसिंग आसान नहीं होती। लेकिन अनुपम सिंह गहलोत ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में पुलिस ने संगठित अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की, अपराध पर अंकुश लगाया और लोगों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत किया।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता केवल अपराधियों के खिलाफ सख्ती नहीं थी, बल्कि आम नागरिकों के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी थी। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की संरक्षक भी है। उनकी कार्यशैली में अनुशासन और मानवीय दृष्टिकोण का अद्भुत संतुलन दिखाई देता था। यही कारण था कि पुलिस विभाग के साथ-साथ आम नागरिक, व्यापारी, उद्योगपति और सामाजिक संगठन भी उनके कार्यकाल की खुले दिल से सराहना करते रहे।

सूरत में त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी रणनीति और नेतृत्व की विशेष भूमिका रही। उन्होंने पुलिस बल को आधुनिक सोच के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया और हर परिस्थिति में टीम भावना को प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में पुलिसकर्मियों का मनोबल भी लगातार ऊंचा बना रहा। वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए केवल वरिष्ठ अधिकारी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे।
यही कारण रहा कि जब उनके अहमदाबाद स्थानांतरण की घोषणा हुई तो पूरे पुलिस महकमे में भावनात्मक माहौल बन गया। पुलिस मुख्यालय में आयोजित विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वह सम्मान और आत्मीयता का अद्भुत दृश्य बन गया। परंपरा के अनुसार फूलों से सजी उनकी कार को वरिष्ठ अधिकारियों ने रस्सी से खींचकर विदा किया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि उन्होंने अपने सहयोगियों के मन में कितना गहरा सम्मान अर्जित किया था। विदाई के उन क्षणों में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें नम थीं। यह सम्मान किसी पद का नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का था जिसने अपने व्यवहार और कार्यों से सभी का विश्वास जीता।
सूरत के प्रति उनकी जवाबदेही हर निर्णय में स्पष्ट दिखाई देती थी। उन्होंने हमेशा शहर के हित को सर्वोपरि रखा। चाहे अपराध नियंत्रण का विषय हो, यातायात व्यवस्था हो या आम नागरिकों की सुरक्षा, उन्होंने हर चुनौती का सामना पूरी निष्ठा और गंभीरता से किया। उनका मानना था कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है, और उन्होंने अपने कार्यकाल में इस विश्वास को निरंतर मजबूत किया। यही कारण है कि आज सूरत के लोग उन्हें केवल एक पुलिस अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि शहर के एक जिम्मेदार संरक्षक के रूप में याद करते हैं।
अब अहमदाबाद जैसे महत्वपूर्ण महानगर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। आगामी वर्षों में बड़े धार्मिक आयोजनों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों तक, अहमदाबाद को एक सक्षम, अनुभवी और दूरदर्शी पुलिस नेतृत्व की आवश्यकता है। अनुपम सिंह गहलोत का अनुभव, प्रशासनिक कौशल और संतुलित नेतृत्व निश्चित रूप से वहां भी नई ऊंचाइयां स्थापित करेगा। जिस प्रकार उन्होंने राजकोट, वडोदरा और सूरत में अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया, उसी प्रकार अहमदाबाद भी उनके नेतृत्व से लाभान्वित होगा।
सूरत के लिए यह विदाई केवल एक अधिकारी के स्थानांतरण की घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसे दौर के समापन का क्षण है जिसने पुलिसिंग को नई दिशा दी। अनुपम सिंह गहलोत ने यह सिद्ध किया कि कठोर प्रशासन और संवेदनशील व्यवहार साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने यह भी साबित किया कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित की भावना से किया गया कार्य हमेशा लोगों के दिलों में सम्मान का स्थान बनाता है।
उनकी विदाई के साथ सूरत एक कुशल, कर्मठ और लोकप्रिय पुलिस आयुक्त को विदा कर रहा है, लेकिन उनके द्वारा स्थापित कार्य संस्कृति, जवाबदेही और जनसेवा की भावना आने वाले समय में भी पुलिस विभाग के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। यही किसी भी सफल अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है कि पद बदल जाता है, लेकिन व्यक्तित्व की छाप लोगों के मन से कभी नहीं मिटती। अनुपम सिंह गहलोत ने अपने कार्यकाल से यह सम्मान अर्जित किया है, और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।

         कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार

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