धर्मनगरी गोगुंदा में संतों का भव्य मंगल प्रवेश महावीर के जयकारों से गूंजा नगर चातुर्मास का हुआ शुभारंभ
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धर्मनगरी गोगुंदा में संतों का भव्य मंगल प्रवेश
महावीर के जयकारों से गूंजा नगर चातुर्मास का हुआ शुभारंभ
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 15 जुलाई 2026
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलक स्थली और धर्मनगरी के रूप में प्रसिद्ध गोगुंदा बुधवार को जैन धर्म की आस्था श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दी। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित चतुर्विध संघ के चातुर्मास का शुभारंभ संतों के भव्य मंगल प्रवेश के साथ हुआ। भगवान महावीर के जयकारों से पूरा कस्बा गूंज उठा और वातावरण धर्ममय बन गया। नगर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं जिन्होंने संतों का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। आयोजन में गोगुंदा सहित राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष गौतम सिंघवी ने बताया कि सुबह आठ बजकर पंद्रह मिनट पर बाईपास चौराहे से शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा बस स्टैंड मुख्य बाजार माणक चौक और ठाकुर देवरा मार्ग से होती हुई जैन स्थानक पहुंची जहां संतों का मंगल प्रवेश कराया गया। शोभायात्रा के दौरान पूरा मार्ग भगवान महावीर के जयकारों और धार्मिक भजनों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर संतों का स्वागत किया और नगरवासियों ने जगह जगह स्वागत द्वार बनाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
शोभायात्रा में महिलाओं ने पारंपरिक बांधनी की साड़ियों में सिर पर मंगल कलश धारण कर धर्म और संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। पुरुषों और युवाओं ने सफेद वेशभूषा धारण कर हाथों में धर्मध्वज लेकर शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। बालक और बालिकाएं भी धार्मिक वेशभूषा में शामिल हुए और भगवान महावीर के संदेशों का प्रचार करते हुए नगर भ्रमण किया। पूरा कस्बा धार्मिक उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

जैन स्थानक पहुंचने पर धर्मसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बालकों द्वारा मंगलाचरण और महिलाओं द्वारा स्वागत गीत की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद आगंतुक संतों अतिथियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों का मेवाड़ी पगड़ी शॉल और माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। बाहर से आए वक्ताओं ने गोगुंदा की धार्मिक परंपराओं की मुक्त कंठ से सराहना की और इसे धर्मनगरी की उपाधि के अनुरूप बताया। वक्ताओं ने कहा कि गोगुंदा केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में भी अग्रणी स्थान रखता है।
महाश्रमण पूज्य गुरुदेव श्री जिनेन्द्र मुनि काव्यतीर्थ ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि मनुष्य को क्रोध मान माया और लोभ जैसे चार प्रमुख कषायों का त्याग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म संयम और तप के बिना जीवन अधूरा है। जिस प्रकार बिना चाशनी के घेवर का स्वाद अधूरा रहता है उसी प्रकार बिना धर्म और तप के मानव जीवन में पूर्णता नहीं आ सकती। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आत्मशुद्धि संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
तपस्वीरत्न प्रवीण मुनि महाराज ने अपने उद्बोधन में आत्मचिंतन और साधना को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्ममंथन का श्रेष्ठ अवसर है जिसमें व्यक्ति अपने जीवन की कमियों को दूर कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नियमित स्वाध्याय ध्यान और तप की आराधना करने का आग्रह किया।

परम विदुषी साध्वी डॉ सुलक्षणप्रभा जी महाराज साहिबा ने धर्म और संयम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के भौतिक युग में आध्यात्मिक जीवन की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। धर्म व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और जीवन में शांति तथा संतुलन प्रदान करता है।
परम विदुषी साध्वी डॉ राजश्री जी महाराज साहिबा ने अपने संबोधन में कहा कि संसार में नेता नोट वोट और सपोर्ट के लिए लोग आते हैं लेकिन संत समाज मानव जीवन के दोषों को दूर करने और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग तप और सेवा का प्रतीक होता है और उनका सानिध्य समाज के लिए अमूल्य धरोहर है।
चातुर्मास व्यवस्था प्रचार प्रसार समिति के गोपाल लोढ़ा ने बताया कि इस आयोजन में समाज के मंत्री छोटूलाल सेठ उपाध्यक्ष नाथूलाल सोलंकी चातुर्मास व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष रमेश मेहता सह मंत्री महेश कोठारी कोषाध्यक्ष विनोद तातेड सुंदरलाल मेहता राजेश मेहता राजेश लोढ़ा संजय मेहता दीपक मेहता तेज सिंह हरकावत ललित मेहता कैलाश लोढ़ा फतहलाल लोढ़ा कन्हैयालाल सिंघवी भोपाल सेठ तरुण मेहता कैलाश कोठारी गजेंद्र हरकावत सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके साथ ही तेरापंथ सभा के अध्यक्ष महेंद्र चोरवडिया चंद्रेश फतावत हीरालाल सुराणा पुष्करधाम सेमटाल अध्यक्ष सुखलाल मादरेचा महावीर गौशाला के कार्यवाहक अध्यक्ष अशोक मादरेचा श्रवण संघ विहार समिति अध्यक्ष संदीप बोल्या ऑल इंडिया जैन कॉन्फ्रेंस की प्रांतीय अध्यक्ष अनीता भंडारी पूर्व जिला प्रमुख मधु मेहता अमर जैन साहित्य संस्थान उदयपुर के अध्यक्ष भंवर सेठ तथा अखिल भारतीय पुष्कर गुरु संगठन समिति के अध्यक्ष संजय भंडारी सहित अनेक धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
महाराष्ट्र सूरत उदयपुर सेरा प्रांत वाकल प्रांत बगडुंदा और भूताला सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोगुंदा पहुंचे। आयोजन के दौरान नगर में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। विशेष बात यह रही कि जैन समाज के साथ अन्य समाज के व्यापारियों ने भी अपनी दुकानें बंद रखकर श्रद्धाभाव से आयोजन में सहभागिता निभाई। इससे सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द का अनूठा संदेश देखने को मिला।
आयोजन को सफल बनाने में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चंदनबाला महिला मंडल तरुण नवयुवक मंडल कन्या मंडल और चातुर्मास सेवा समिति के सदस्यों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। सभी समितियों ने व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए दिनभर सक्रिय रहकर अपनी सेवाएं दीं।
संघ अध्यक्ष नाथूलाल मेहता ने कार्यक्रम के अंत में सभी संतों अतिथियों श्रद्धालुओं और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बन सका है।
गौतम सिंघवी ने जानकारी दी कि आगामी 27 जुलाई से चातुर्मास के नियमित धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे। इस दौरान प्रतिदिन प्रवचन ध्यान स्वाध्याय और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी दिन से तेले तप की आराधना भी प्रारंभ होगी जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। उन्होंने सभी धर्मप्रेमियों से चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया।
मंगल प्रवेश समारोह का संचालन संपत राज जसनगर वाले और सुनील लोढ़ा ने किया जबकि सामूहिक वंदना का आयोजन कड़िया के सोहनलाल जैन ने कराया। पूरे आयोजन ने गोगुंदा की धार्मिक परंपरा आस्था और सामाजिक एकता को नई ऊंचाई प्रदान करते हुए चातुर्मास की मंगलमय शुरुआत का साक्षी बनाया।
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