धर्मसभा में त्याग, तपस्या और संयम को जीवन का आधार बनाने का आह्वान, 4 सितंबर को तीन महान आत्माओं का जन्मोत्सव*
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ब्रह्मपुरी जैन स्थानक में गूंजा नवकार महामंत्र का संदेश
*धर्मसभा में त्याग, तपस्या और संयम को जीवन का आधार बनाने का आह्वान, 4 सितंबर को तीन महान आत्माओं का जन्मोत्सव*
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 2 सितम्बर
कस्बे के ब्रह्मपुरी स्थित वर्धमान स्थानकवासी जैन स्थानक में बुधवार को आध्यात्मिक चातुर्मास के अंतर्गत धर्मसभा का आयोजन हुआ। धर्मसभा में साधु-साध्वियों ने श्रद्धालुओं को धर्म, साधना, संयम और सदाचार के महत्व से अवगत कराया। प्रवचनों के दौरान नवकार महामंत्र की आध्यात्मिक शक्ति और पंच परमेष्ठी के स्मरण से जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलावों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर साधु-साध्वियों के प्रवचनों का लाभ लिया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए महाश्रमण जिनेंद्र मुनि म. सा. ने कहा कि मनुष्य के जीवन में त्याग और तपस्या का विशेष महत्व है। केवल बाहरी रूप से धार्मिक गतिविधियों में शामिल होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धर्म के सिद्धांतों को जीवन के व्यवहार में उतारना आवश्यक है। संत ने पंच परमेष्ठी के प्रति श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि नियमित रूप से उनके स्मरण और चिंतन से व्यक्ति के विचारों में शुद्धता आती है और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।

साध्वी राजश्री ने अपने प्रवचन में नवकार महामंत्र की साधना, आराधना और महिमा को विस्तार से समझाया। साध्वी ने कहा कि नवकार महामंत्र केवल मंत्रोच्चार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने वाला महामंत्र है। राजश्री ने चिंतामणि रत्न का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी मूल्यवान वस्तु की वास्तविक कीमत तभी समझ में आती है, जब उसके गुण और महत्व की सही पहचान हो। इसी प्रकार नवकार महामंत्र की वास्तविक महिमा को समझकर श्रद्धा और नियमित साधना के साथ उसका जाप किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

साध्वी सुलक्षणा प्रभा ने बड़ी साधु वंदना तथा ‘नमो लोए सव्व साहूणं’ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। साध्वी ने साधु-साध्वियों के प्रति श्रद्धा, विनय और सम्मान को आत्मिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक धर्म संदेश को सुना।
धर्मसभा में आगामी 4 सितंबर को आयोजित होने वाले विशेष जन्मोत्सव को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के साथ जिनेंद्र मुनि म. सा. का 77वां जन्मोत्सव तथा जिन शासन चंद्रिका गुरुवर्या शील कंवरजी म. सा. की जन्म जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। आयोजन को लेकर स्थानक में तैयारियां की जा रही हैं। साधु-साध्वियों ने इस अवसर को गुरु-भक्ति, श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक चेतना का विशेष पर्व बताया।
साध्वी राजश्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे 4 सितंबर के इस विशेष आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनें और गुरु एवं गुरुवर्या के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को धर्म और संस्कारों से जोड़ने के साथ आत्मचिंतन की प्रेरणा भी देते हैं।
धर्मसभा के संयोजक सुंदरलाल मेहता ने बाहर से आए अतिथियों और धर्मप्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि चातुर्मास के दौरान स्थानक में नियमित रूप से धार्मिक प्रवचन, नवकार महामंत्र जाप और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मीडिया प्रभारी गोपाल ने भी 4 सितंबर को होने वाले जन्मोत्सव में समाज के अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं से सहभागिता का आग्रह किया।
कार्यक्रम में तेरापंथ सभा के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। अंत में जिनेंद्र मुनि म सा ने मंगल पाठ कराया। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, सदाचार और आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
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