नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9974940324 8955950335 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , संवत्सरी पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश,* *जप-तप साधना के साथ तपस्वियों ने लिया त्याग का संकल्प* – भारत दर्पण लाइव

संवत्सरी पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश,* *जप-तप साधना के साथ तपस्वियों ने लिया त्याग का संकल्प*

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

*संवत्सरी पर क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश,*
*जप-तप साधना के साथ तपस्वियों ने लिया त्याग का संकल्प*
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 15 सितम्बर 26
जैन धर्म के आध्यात्मिक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन मंगलवार को श्वेतांबर जैन समाज की ओर से संवत्सरी महापर्व श्रद्धा, भक्ति, संयम और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। आठ दिनों तक चले पर्युषण पर्व का समापन संवत्सरी के रूप में हुआ। इस अवसर पर स्थानक में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर जप, तप, स्वाध्याय, ध्यान, प्रतिक्रमण और धार्मिक साधना के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास किया। पूरे वातावरण में आध्यात्मिकता और क्षमाभाव की भावना दिखाई दी।
संवत्सरी महापर्व को जैन धर्म में आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना गया है। इस दिन व्यक्ति अपने जीवन में हुई भूलों और गलतियों का चिंतन करते हुए स्वयं में सुधार का संकल्प लेता है। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने बाहरी आडंबर से दूर रहकर अपने भीतर झांकने और जीवन में संयम, सद्भाव तथा क्षमा के भाव को मजबूत करने का संदेश ग्रहण किया। पर्युषण के दौरान स्थानक में चल रहा नवकार महामंत्र का अखंड जाप भी श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी रहा।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए जिनेंद्र मुनि मसा ने संवत्सरी महापर्व की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को स्वयं के आचरण का मूल्यांकन करने और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है। आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान सकता है और संयम तथा क्षमा को जीवन का हिस्सा बनाकर आत्मिक शांति की ओर आगे बढ़ सकता है।
तपस्वी रत्न प्रवीण मुनि ने पर्युषण महापर्व में तपस्या के महत्व को समझाते हुए कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि इच्छाओं और विकारों पर नियंत्रण पाने की साधना है। तप के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर धैर्य, सहनशीलता और आत्मसंयम का विकास करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी सामर्थ्य के अनुसार धार्मिक साधना करते हुए जीवन में त्याग और संयम को अपनाने का आह्वान किया।


धर्मसभा में साध्वी राजश्रीजी ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन करते हुए महान आत्माओं के चारित्र, त्याग और संयम से जुड़े जीवन प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का जीवन केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उससे प्रेरणा लेकर अपने आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए है। उनके त्याग और साधना से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन को सदाचार और आत्मसंयम की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
साध्वी सुलक्षणाप्रभाजी ने पर्युषण और संवत्सरी महापर्व की महत्ता बताते हुए कहा कि इन दिनों की गई धार्मिक साधना का उद्देश्य आत्मा को निर्मल बनाना है। व्यक्ति को अपने व्यवहार, विचार और कर्मों का निरीक्षण करना चाहिए तथा जिनसे भी जाने-अनजाने में मन, वचन या कर्म से कोई भूल हुई हो, उनके प्रति क्षमाभाव रखना चाहिए। क्षमा को जीवन में उतारने से मन का भार कम होता है और आपसी संबंधों में मधुरता बढ़ती है।
चातुर्मास के दौरान श्रावक-श्राविकाओं की ओर से तप, तपस्या और दान का क्रम भी लगातार जारी है। संवत्सरी के अवसर पर धर्मसभा में तपस्वियों ने अपनी तपस्या के पचखान ग्रहण किए। यशोदा सेठ ने नौ की तपस्या की, जबकि महेश कोठारी, भाविक हरकावत, मंजू पोरवाल और पुष्पा जैन ने आठ की तपस्या के पचखान किए। इनके साथ पांच, तीन, दो और उपवास सहित विभिन्न प्रकार की तपस्याओं के भी पचखान लिए गए। तपस्वियों के तप की समाजजनों ने सराहना करते हुए उनके त्याग और साधना का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम संयोजक सुंदरलाल मेहता ने धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से जप, तप, स्वाध्याय और धार्मिक साधना में अधिक से अधिक सहभागिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व से प्राप्त आध्यात्मिक संदेश को केवल पर्व तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन में अपनाना ही इसकी सार्थकता है। कार्यक्रम के समापन पर महाश्रमण जिनेंद्र मुनि महाराज साहब ने मंगल पाठ कराया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे और श्रद्धा के साथ संवत्सरी महापर्व का समापन किया।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930