नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9974940324 8955950335 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , मधुर वाणी और विनय से परिवार में उतरता है सुख पर्युषण के सातवें दिन* *धर्मसभा में आत्मचिंतन और सद्भावना की सीख* – भारत दर्पण लाइव

मधुर वाणी और विनय से परिवार में उतरता है सुख पर्युषण के सातवें दिन* *धर्मसभा में आत्मचिंतन और सद्भावना की सीख*

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

*मधुर वाणी और विनय से परिवार में उतरता है सुख पर्युषण के सातवें दिन* *धर्मसभा में आत्मचिंतन और सद्भावना की सीख*
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 14 सितम्बर 26
जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख आध्यात्मिक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के सातवें दिन सोमवार को श्वेतांबर जैन समाज की ओर से स्थानक में धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर उपवास, तप, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, ध्यान और धार्मिक साधना के माध्यम से आत्मचिंतन किया। पर्युषण महापर्व के दौरान नवकार महामंत्र का अखंड जाप भी श्रद्धा और भक्ति के साथ निरंतर जारी है।
धर्मसभा का शुभारंभ जिनेंद्र मुनि मसा ने प्रभु भजन के साथ किया। प्रवचन में उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन को सुखी, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को अहंकार का त्याग कर विनय भाव के साथ जीवन जीना चाहिए। परिवार में प्रेम, सम्मान और सद्भावना का वातावरण हो तो घर स्वर्ग के समान बन जाता है, जबकि आपसी मनमुटाव और कटुता के कारण सुख-सुविधाओं से भरा घर भी अशांत हो सकता है। संत ने कहा कि मनुष्य की वाणी उसके व्यक्तित्व और संस्कारों को दर्शाती है, इसलिए हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए। कठोर शब्द रिश्तों में दूरी पैदा कर सकते हैं, जबकि प्रेम और विनय से कही गई बात मन को जोड़ने का काम करती है।


साध्वी राजश्रीजी ने सूत्र के वाचन के दौरान अतिमुक्त कुमार के जीवन चरित्र के साथ ऐवंता मुनिवर, जम्बू स्वामी और भगवान महावीर स्वामी के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया। साध्वी ने कहा कि परिवार में मधुरता, प्रेम और आपसी सम्मान बना रहे तो गृहस्थ जीवन आनंदमय हो सकता है। उन्होंने परिवार और समाज में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सास-बहू के रिश्ते को लेकर भी प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि यदि बहू को बेटी और सास को मां के समान मानने की भावना विकसित हो जाए तो परिवार में प्रेम, शांति और सौहार्द का वातावरण कायम किया जा सकता है। रिश्तों में अधिकार से अधिक अपनापन और व्यवहार में कठोरता से अधिक मधुरता जरूरी है।
साध्वी सुलक्षणाप्रभाजी ने आत्मा के अनेक गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य अपने ही अवगुणों के कारण आत्मा के गुणों को ढक देता है। क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष जैसी प्रवृत्तियां व्यक्ति के भीतर की शांति को प्रभावित करती हैं। उन्होंने मैत्री भाव और द्वेष भावना के अंतर को समझाते हुए कहा कि दूसरों के प्रति सद्भाव रखने से मन निर्मल होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। पर्युषण आत्मनिरीक्षण का पर्व है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और विचारों पर चिंतन कर जीवन में आवश्यक सुधार करने का प्रयास करना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान श्रावक-श्राविकाओं की ओर से तप-तपस्या का क्रम भी श्रद्धा के साथ जारी है। महेश कोठारी, भाविक हरकावत, मंजू पोरवाल और पुष्पा जैन की तपस्या जारी है। समाज के धर्मप्रेमी लोग तप, जप और साधना के माध्यम से पर्युषण महापर्व की आध्यात्मिक भावना को आत्मसात कर रहे हैं। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक वातावरण में साधना कर आत्मशुद्धि और संयम की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम संयोजक सुंदरलाल मेहता ने धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में जप, तप और धार्मिक साधना में सहभागिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं के भीतर झांकने और जीवन को बेहतर बनाने का अवसर भी है। कार्यक्रम के समापन पर महाश्रमण जिनेंद्र मुनि मसा ने मंगल पाठ कराया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। इस अवसर पर महेश कोठारी और छोटूलाल सेठ की ओर से प्रभावना वितरित की गई।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930