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पर्युषण के पांचवें दिन गोगुंदा में गूंजा भगवान महावीर के जन्म कल्याणक का जयघोष*

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*पर्युषण के पांचवें दिन गोगुंदा में गूंजा भगवान महावीर के जन्म कल्याणक का जयघोष*
“तेले तप के तपस्वियों का किया सम्मान माता-पिता के संस्कारों को बताया जीवन की सबसे बड़ी पूंजी”

कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 12 सितम्बर 26

जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख आध्यात्मिक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन शनिवार को गोगुंदा में श्रद्धा, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का वातावरण रहा। श्वेतांबर जैन समाज की ओर से स्थानक में आयोजित धर्मसभा में भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता करते हुए उपवास, तप, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, ध्यान और धार्मिक साधना के माध्यम से आत्मचिंतन किया। पर्युषण पर्व के अंतर्गत नवकार महामंत्र का अखंड जाप भी श्रद्धा के साथ जारी रहा।

धर्मसभा में जिनेंद्र मुनि मसा ने पर्युषण महापर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मनिरीक्षण और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर है। भगवान महावीर के अहिंसा, संयम, त्याग और करुणा के संदेश को अपने आचरण में उतारकर ही इस पर्व की सार्थकता सिद्ध हो सकती है।

संत ने माता-पिता के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मां ममता की खान होती है और बच्चों के जीवन में संस्कार निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता के स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद का विशेष महत्व है। वर्तमान समय में बच्चों में बढ़ते मोबाइल उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को हर समय मोबाइल देने के बजाय उनके संस्कार, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। परिवार का वातावरण ही बच्चे के भविष्य की दिशा तय करता है।
साध्वी राजश्रीजी ने अंतगढ़ सूत्र के वाचन के दौरान देवकी महारानी, श्रीकृष्ण वासुदेव और गज सुकुमाल के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता-पिता की महानता बताते हुए कहा कि माता-पिता स्वयं तीर्थ के समान होते हैं। उनके आशीर्वाद और संस्कारों से संतान के जीवन को सही दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा और कृतज्ञता का भाव रखना प्रत्येक संतान का कर्तव्य है।
साध्वी सुलक्षणाप्रभा ने भी मां की ममता और संस्कारों की महत्ता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मां अपनी संतान को अच्छे संस्कार देकर उसके जीवन को संस्कारित बनाती है। संस्कारवान संतान परिवार के साथ समाज और धर्म की प्रभावना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से धर्म और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

चातुर्मास कार्यक्रम के दौरान तेले तप की कठिन तपस्या करने वाले तपस्वियों का सम्मान किया गया। मगनलाल मेहता एवं उनके परिवार की ओर से तपस्वियों का स्वागत किया गया। भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के लाभार्थी समाज अध्यक्ष नाथूलाल मेहता, रमेश मेहता एवं उनके परिजनों ने भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को पालने में झुलाकर जन्म कल्याणक की खुशी मनाई। इस अवसर पर बाहर से आए अतिथियों का भी समाजजनों की ओर से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम संयोजक सुंदरलाल मेहता ने धर्मप्रेमियों से पर्युषण महापर्व के दौरान अधिक से अधिक जप, तप, स्वाध्याय और धार्मिक साधना में सहभागिता करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर महाश्रमण जिनेंद्र मुनि महाराज साहब ने मंगल पाठ कराया। शनिवार की प्रभावना नंदलाल सिंघवी एवं दिलीप सेठ की ओर से वितरित की गई। धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।

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