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*हिंसा से विश्व की किसी भी समस्या का समाधान नही-जिनेन्द्रमुनि मसा*

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*हिंसा से विश्व की किसी भी समस्या का समाधन नही-जिनेन्द्रमुनि मसा*

कांतिलाल मांडोत

गोगुन्दा 2 अगस्त
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वाधान में धर्मसभा मे जिनेन्द्रमुनि मसा ने कहा कि विश्व में हिंसा बढ़ रही है।भगवान महावीर ने मत मारो का संदेश भारत को ही नही पूरे विश्व को दिया था।महावीर ने अहिंसा व्रत का पूर्णरूपेण पालन करते हुए कहा कि स्वयं हिंसा न करना ही अहिंसा का निवृति रूप है।विश्व में आतंकवाद चरम पर है।आज एक दूसरे की हिंसा करने में कोई संकोच नही करते है ।अहिंसा परमो धर्म पर आस्था रखने वाला जैन समाज यह कभी नही स्वीकार करेगा कि किसी निर्दोष व्यक्ति या निर्दोष प्राणी की जान ले ली जाए।संत ने कहा कि हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नही है। हिंसा से हिंसा बढ़ती है।मन मे उठने वाले भाव भी भाव हिंसा है।अतः मुनि ने भार पूर्वक कहा कि मनसा वाचा कर्मणा से भी हिंसात्मक प्रवृति का कोई दोष नही लगे,उसका पालन हर धर्मानुरागी भाई बहनों को करना है।मुनि ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी सुख साधनों के लिए अनेक प्रकार की अज्ञान युक्त प्रवृति करता है परन्तु जिस प्रकार खून से सना कपडा खून से साफ नही किया जाता है उसी प्रकार इन प्रवृत्तियों से सुख के बदले विशेष दुःखी होकर अन्य जीवों के प्राणों की बात करने से भी निमित बनते है।मुनि ने कहा कि दियासलाई दुसरो को जलाने जाती है किंतु प्रथम स्वयं को ही जलना पड़ता है।महाश्रमण जिनेन्द्रमुनि ने कहा कि उसी प्रकार जीवो की हिंसा का ख्याल न रखकर अपने सुख के लिए जो अनर्गल प्रवृति करते है वे वेरानुबन्द करके स्वयं दुःखी होते है।भाव व द्रव्य हिंसा से बचते हुए आत्म कल्याण की भावना रखनी चाहिए।रीतेश मुनि ने कहा कि क्रिया से कर्म जुड़ा हुआ है।कर्म का फल विनाशी है।विनाशी के योग से विनाश ही होता है।उपलब्धि कुछ नही होती है।संत ने कहा विनाशी के त्याग से ही विनाश का विनाश सम्भव है।जिससे स्वयं विकास होता है।प्रभातमुनि ने कहा कि भोग प्रवृति के त्याग की कामना ममता अहंभाव की प्रवृति होती है।कामना निवृति से अशांति मिलती है।सुख भोग से सुख के समान प्रति क्षण क्षीण नही होता है अतः वह क्षणिक सुख नही होता है।प्रवीण मुनि मसा ने मंगलाचरण किया।इस अवसर पर जयसमंद और सलूम्बर से श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।दर्शन लाभ लिया और संतो के दर्शन कर सुख साता पूछते हुए अभिवादन किया।

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