नंदीगांव में बहिन-बेटी स्नेह सम्मेलन बना यादगार उत्सव तरपाल गांव की 120 बहनों ने परंपरा, संस्कृति और स्नेह को फिर से जीवंत किया*
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*नंदीगांव में बहिन-बेटी स्नेह सम्मेलन बना यादगार उत्सव तरपाल गांव की 120 बहनों ने परंपरा, संस्कृति और स्नेह को फिर से जीवंत किया
डॉ अनिता जैन
भिलाड नन्दीगांव 31 जनवरी 2026
नंदीगांव में आज अपने तरपाल गांव की बहिन-बेटी स्नेह सम्मेलन का आयोजन अत्यंत सुंदर, भावनात्मक और उल्लासपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। यह आयोजन बहनों के आपसी मिलन और गांव की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की एक अनूठी पहल के रूप में सामने आया, जिसमें शामिल सभी बहन-बेटियों ने पूरे मन से भाग लिया और भरपूर आनंद उठाया। यह बहिन-बेटी मिलन की पहली पहल थी, जिसने अपने आप में एक नई परंपरा की नींव रख दी और जिसकी हर ओर सराहना होती नजर आई।

सम्मेलन के दौरान प्रतियोगिताओं, गांव की पुरानी परंपरा ‘हन्नी’, लोकनृत्य, पारंपरिक गीतों और भजनों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। गांव की बहनों ने इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उत्साह के साथ भाग लिया और बचपन की स्मृतियों को फिर से जीवंत कर दिया। गोगुन्दा क्षेत्र के तरपाल गांव की कुल 120 बहन-बेटियों ने भिलाड स्थित नंदीगांव में आयोजित इस कार्यक्रम में सहभागिता की। तरपाल के मांडोत, घटावत, भोगर, ढालावत, सिंधवी, बम्बोरी और तलेसरा परिवारों की बहन-बेटियां इस स्नेह मिलन समारोह में एकत्रित हुईं, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण पारंपरिक गणगौर नृत्य और गणगौर उत्सव रहा। बहनों ने अपने बचपन की उन यादों को साझा किया, जब वे गांव में गणगौर की पूजा-अर्चना करती थीं और नृत्य में भाग लेती थीं। इन पलों ने सभी को भावुक कर दिया और गांव की मिट्टी से जुड़ाव की भावना को और गहरा किया। बचपन से युवावस्था तक के अनुभवों को साझा करते हुए बहनों ने यह महसूस किया कि समय भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन आपसी स्नेह और संस्कार आज भी वही हैं।

विश्व धरोहर नगरी उदयपुर की राजतिलक स्थली गोगुन्दा के तरपाल गांव की बहन-बेटियों का यह स्नेह मिलन समारोह किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। पूरे आयोजन में आपसी प्रेम, सम्मान और एकता की झलक साफ दिखाई दी। कार्यक्रम के दौरान सभी बहन-बेटियों को संबोधित करते हुए यह आह्वान किया गया कि इस पहल को हर वर्ष और भी यादगार बनाया जाए। अगले वर्ष होने वाले बहिन-बेटी सम्मेलन के लिए अभी से पूर्व तैयारी और आयोजन की रूपरेखा तय करने हेतु चिंतन-मनन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इस सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि गांव की परंपराएं, रिश्तों की गर्माहट और सामूहिकता आज भी उतनी ही मजबूत है। बहनों का यह सुंदर प्रयास आने वाले वर्षों में एक स्थायी परंपरा का रूप लेगा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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