मणिपुर में फिर सरकार बनाने की कवायद शुरू*
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*मणिपुर में फिर सरकार बनाने की कवायद शुरू*
मणिपुर की हिंसा से पूरा देश आहत था।पिछले दो वर्षो से मणिपुर के हालात खराब है।दो समुदायों के बीच हिंसक झड़पो से मानवता को शर्मसार कर दिया है।मणिपुर में राष्ट्रपति शासन है।मणिपुर अब फिर सुर्खियों में है।पूर्वोत्तर के इस हिंसाग्रस्त राज्य में सरकार गठन की कवायद शुरू हो गई है।म्यांमार से घुसपैठ की इस पीड़ा को बहुत समय तक सहन करने की मजबूरी आ पड़ी थी।हिंसा में दोनों समुदाय के लोगो की मौते और जानमाल की हानि हुई। नतीजतन,मणिपुर की घटना इतिहास बनकर रह गई थी।
पूर्व में दोनों समुदाय के प्रतिनिधियो ने दिल्ली में बैठक की गई और मैतेई और कुकी दोनों समाज के प्रतिनिधियों ने शांति बहाल करने के पूर्व शर्ते रखी थी।बैठक के बाद मणिपुर रवाना हुए प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि हम समाज को सूचित करेंगे।जिसमें अलग राज्य की भी मांग थी।राष्ट्रपति शासन के बाद अब बात आई है कि मणिपुर में सरकार गठन की चर्चा चल रही है।जबकि सरकार बनाने का दावा किसी की तरफ से नही किया गया है।न तो बीजेपी और न ही मणिपुर बीजेपी किसी भी दल की तरफ से कोई चर्चा नही हुई है।राज्य में अभी शांति है।
दो समुदाय के लोगो के बीच वर्षो से वर्चस्व की लड़ाई चल रही है।पूर्व मे हिंसा बढ़ने से कई लोगो की मौते हो गई। लिहाजा राजनैतिक पार्टियों ने मणिपुर के हिंसा क्षेत्र का दौरा भी किया।अनेक बैठके हुई और दोनों समुदाय को शांति बनाने की अपील की गई,लेकिन दिन दुगुनी झड़पें तेज होती गई।दोनों समुदाय के लड़ाकों ने हिंसक प्रदर्शन किया।मैतेई समुदाय के लोगो ने कुकी समाज तो कुकी समाज के लोगो ने मैतेई समाज के लोगो पर हिंसक झड़पो का सिलसिला कई महीनों तक जारी रखा।लेकिन अब शांति और अमन की तस्वीरे आ रही है।
जनता अब राष्ट्रपति शासन नही चाहती है।भाजपा के विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह के साथ भाजपा के दस विधायको ने राज्यपाल से मुलाकात की।एनडीए के दस विधायको के डेलिगेशन ने भाजपा के 44 विधायकों के समर्थन का दावा कर सरकार बनाने की बात कही है।डेलिगेशन की मुलाकात के बाद विधायक राधेश्याम सिंह का कहना है कि फैसला केंद्रीय नेतृत्व को करना है।मणिपुर की हिंसा से आम नागरिक परेशान थे।चारो तरफ अराजकता के बाद राष्ट्रपति शासन से जनता घुटन महसूस कर रही थी।अब लोग खुली हवा में सांस लेना चाहते है।सभी विधायकों को एक एक कर मुलाकात की गई है।इन विधायकों में से किसी ने भी सरकार गठन का विरोध नही किया है।सेंटिमेंट टेस्ट की रणनीति जवाबदार है और इसमें जनता परेशान हो रही है। भाजपा की सोच सरकार बनाने की हो सकती है।
सरकार आश्वस्त करने की रणनीति बना सकती है।एम वीरेंद्र सिंह भाजपा दल से मुख्यमंत्री थे।अब 2027 में विधानसभा चुनाव में फिर से मुख्यमंत्री के दावेदार एम वीरेंद्रसिंह का नाम आगे रहेगा।मणिपुर में चर्चा जोरों पर है कि अगला मुख्यमंत्री गैर मैतेई और गैर कुकी समाज से होना चाहिए।।इन दोनों समुदाय के बीच ग्यारह का आंकड़ा है और अगर दूसरे समाज से मुख्यमंत्री बनता है तो दोनों समतोल रहेगा।कुकी समाज के एकवर्ग के पक्ष का आरोप लगता आ रहा है।और समुदाय विशेष का मुख्यमंत्री बनता है तो फिर शंका की सूई उसी तरफ जाएगी।मणिपुर में शांति के लिए कई बार वीरेन्द्रसिंह के इस्तीफे की मांग करते रहे है।इस पर मैतेई वोटबैंक की ताकत को ही वजह बताया है।मणिपुर में अभी शांति का वातावरण है और मणिपुर के मुख्यमंत्री का चयन हो जाता है तो सबसे बड़ा फायदा विधानसभा चुनाव में भाजपा को ही मिलेगा।60 विधायको वाली स्ट्रेंथ 59 सदस्यों की है।एक विधायक का निधन होने के कारण सीट रिक्त है।बीजेपी के साथ 44 विधायक है।जिसमे बहुमत के लिए 31 विधायक की आवश्यकता है।जातीय हिंसा का दंश जेल रहे मणिपुर के लोगो के पास मैतेई के 32 विधायक है।तीन मणिपुर मुस्लिम और नौ नागा विधायक शामिल है।इसका आंकड़ा 44 होता है।मणिपुर में 37 मैतेई विधायक है और सरकार बनाने के लिए 31 विधायको की जरूरत है।भाजपा सरकार बना सकती है।अगर आगामी दिनों में सरकार बनती है तो लोग राष्ट्रपति शासन से मुक्त हो जाएंगे।

*कांतिलाल मांडोत*
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