नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9974940324 8955950335 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , नव ऊर्जा संचित कर राष्ट्र कल्याण की प्रेरणा देते है हमे रास्ट्रीय पर्व* – भारत दर्पण लाइव

नव ऊर्जा संचित कर राष्ट्र कल्याण की प्रेरणा देते है हमे रास्ट्रीय पर्व*

Oplus_131072

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

*नव ऊर्जा संचित कर राष्ट्र कल्याण की प्रेरणा देते है हमे रास्ट्रीय पर्व*
कांतिलाल मांडोत
मुम्बई 15 अगस्त 2025
पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ सैंतालीस का वह दिव्य प्रभात देश के लिए कितने आनन्द उल्लास का रहा होगा जो एक हजार वर्ष की गुलामी को भोगकर सर्व तंत्र स्वतंत्र हुआ।आज हम अपनी उस स्वतंत्रता की स्मृति को चिरस्थायी बनाये रखने के लिए प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाते है। आजादी के बारे नौनिहालों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।भारत को आजादी कैसे मिली।यह धरती शहीदों के खून से सींची गई है।अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करना मासी का घर नही था।नौनिहालों में जोश और उमंग आंखों में झलकता है।
उठ जाग मुसाफिर भोर भई का सहगान गाते हुये बालक प्रभात फेरी निकालते थे।राष्ट्र ध्वज तिरंगा मुक्त गगन में फहराया जा रहा है।आज हम स्मरण करते है, देश के उन नौनिहालों का,जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए हंसते हंसते स्वयं का बलिदान कर दिया।इसी दिन के लिए कई माताओ के सपूत,बहिनो के भाई फांसी के झूलो पर झूल गये।उन अनगिनत वीरो ने अंग्रेजो की गोलियों को पीठ पर ही नही,बल्कि अपने सिनो पर झेला था।
कितने क्रूर थे अंग्रेज,जिन्होंने जलियो वाले बाग में निहत्थे सभा पर गोलियो की बौछार करके दानवता का नग्न प्रदर्शन किया था। अंग्रेज डायर के उस क्रूर कृत्य को इतिहास कभी क्षमा नही करेगा।अमृतसर की धरती अपने सपूतो के लहू से लाल हो गई।सचमुच इंसानियत उस दिन फुट फुटकर रोई थी।सोचो,उस क्रूरता से आजादी के तराने मौन हो गये?आजादी के दीवाने शांत हो गए?नही,बल्कि और अधिक भड़की।हम देशवासियों के पास शस्त्र कहा थे जो उनसे सामना करते?उनके पास बंदूके और गोलिया थी तो हमारे पास देश प्रेम के तराने गाती मस्तानो की टोलियां थी।चन्द्रशेखर आजाद,भगतसिंह, सुखदेव, अशफाक उल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे देशभक्त सिर पर कफ़न बांधकर चलने वाले वीर थे और ये दुर्बल देह में महावीर भगवान सा संकल्प धारण किये,सोटी और लँगोटी पहने अहिंसा और सत्याग्रह का वैचारिक शस्त्र धारण कर चलने वाली गांधी।गांधी की आंधी से यूनियन जैक हिल गया और उसके स्थान पर चढ़ गया अशोक चक्राहित तिरंगा, उसे देखकर समस्त भारतीयों के मन बांसों उछलने लगे।मन मयूर नाच उठे।ह्दय कमल खिल उठे।जीवन के कण कण में नव चेतना, नव जागृति अटखेलियाँ करने लगी,राष्ट्रभक्तो के गगन भेदी नारो से बहु मंडल गूंज उठा।
आजादी की खुशी में देश के बंटवारे की पीड़ा को भी भूल गये।आबाल, वृद्ध,वनिता सभी प्रसन्न थे।सभी का मुखमंडल खिलखिलाकर हंस रहा था।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930