क्षमा भाव से हुआ पर्युषण का समापन मन वचन कर्म की भूलों के लिए मांगी क्षमा*
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
*क्षमा भाव से हुआ पर्युषण का समापन मन वचन कर्म की भूलों के लिए मांगी क्षमा*
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 16 सितंबर 26
जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख आध्यात्मिक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के समापन के बाद बुधवार को क्षमायाचना दिवस श्रद्धा, साधना और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन स्थानक में गोगुंदा के सर्व जैन समाज की ओर से विशेष धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर वर्षभर में मन, वचन और कर्म से हुई जाने-अनजाने की भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी और मैत्री तथा सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
क्षमायाचना पर्व के अवसर पर तेरापंथ समाज की उपासिका कविता एवं उपासिका संगीता भी समाजजनों के साथ जैन स्थानक पहुंचीं। धर्मसभा में उन्होंने क्षमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा केवल किसी से माफी मांगने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आपसी सौहार्द की भावना है। मन में किसी के प्रति वैर या कटुता रखने के बजाय क्षमा भाव अपनाने से जीवन में शांति और सहजता आती है। पर्युषण महापर्व के दौरान आत्मनिरीक्षण और संयम की जो साधना की गई, उसे जीवन में निरंतर बनाए रखना ही इस पर्व की सार्थकता है।
धर्मसभा में पूज्य गुरुदेव महाश्रमण जिनेंद्र मुनि काव्यतीर्थ ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से क्षमायाचना पर्व की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि मनुष्य से जीवन में भूल होना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी भूल को स्वीकार करना और उसके लिए क्षमा मांगना आत्मबल का परिचायक है। क्षमा मांगने से अहंकार कम होता है और संबंधों में मधुरता आती है। क्षमा का भाव व्यक्ति को भीतर से हल्का करता है और आत्मा को शुद्धि की ओर ले जाता है।
साध्वी सुलक्षणाप्रभाजी ने नवकार महामंत्र पर आधारित भजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को क्षमा, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया। भजन और धार्मिक वातावरण के बीच धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने पर्युषण के दौरान की गई साधना और तपस्या को आत्मकल्याण का माध्यम बनाने का संकल्प लिया।
आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व के दौरान जैन स्थानक में चल रहा नवकार महामंत्र का अखंड जाप भी विधि-विधान के साथ पूर्ण हुआ। लगातार आठ दिनों तक श्रद्धालुओं ने नवकार महामंत्र का जाप करते हुए वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अखंड जाप की पूर्णाहुति के अवसर पर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।
इस अवसर पर तेरापंथ समाज की ओर से महेंद्र चोरड़िया ने समाजजनों की ओर से ‘मिच्छामी दुक्कडम’ कहते हुए क्षमायाचना की। कार्यक्रम संयोजक सुंदरलाल मेहता ने भी धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाओं से वर्षभर में हुई जाने-अनजाने की भूलों के लिए क्षमा मांगी। इसके बाद उपस्थित सभी समाजजनों ने एक-दूसरे से सामूहिक रूप से क्षमा याचना की। वातावरण में परस्पर प्रेम, मैत्री और आत्मीयता की भावना दिखाई दी।
कार्यक्रम के पश्चात पर्युषण महापर्व के दौरान आठ दिनों तक हुए अखंड नवकार महामंत्र जाप के पाट को संत-सतियों के साथ प्रकाश लोढ़ा के घर तक पहुंचाया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से सहभागिता की। इसके बाद तपस्वियों के पारणे करवाए गए। आठ दिनों तक उपवास, तप और विभिन्न धार्मिक साधनाओं में लगे तपस्वियों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाश्रमण जिनेंद्र मुनि महाराज साहेब ने मंगल पाठ कराया। मंगल पाठ के दौरान श्रद्धालुओं ने धर्म, संयम, क्षमा और आत्मचिंतन के भाव को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। नवकारसी एवं स्वामी वात्सल्य का आयोजन खूबीलाल हरकावत की ओर से करवाया गया। इसमें समाजजनों ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया।
पर्युषण महापर्व के समापन और क्षमायाचना दिवस ने समाज को यह संदेश दिया कि पर्व की वास्तविक सार्थकता केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, अहंकार त्याग, क्षमा और आपसी प्रेम को जीवन का हिस्सा बनाने में है। ‘मिच्छामी दुक्कडम’ के साथ गोगुंदा के जैन समाज ने इसी भावना के साथ पर्व का समापन किय
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space





