नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9974940324 8955950335 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , अयोध्या मन्दिर में बिराजमान हुए रघुराई,दुनिया मे उत्साह पारावार* – भारत दर्पण लाइव

अयोध्या मन्दिर में बिराजमान हुए रघुराई,दुनिया मे उत्साह पारावार*

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

*अयोध्या मन्दिर में बिराजमान हुए रघुराई,दुनिया मे उत्साह पारावार*

जिन भगवान के गुणों की स्तुति गणधरों ने की है।किंतु उनके अनंतानंत गुणों का पार गणधर भी नही पा सके तो साधारण मनुष्य कैसे पा सकते है।उनके गुण हमारी बुद्धि के अगम्य है।जैसे आकाश अनन्त है वैसे ही भगवान के गुण भी अनन्त है।मेरु पर्वत के बराबर स्याही का ढेर हो,समुद्र के समान बड़ी दवात हो,कल्पवृक्ष की लेखनी होऔर पृथ्वी जितना बड़ा कागज हो तथा लिखने वाली स्वयं सरस्वती हो वह भी पल्योपम सागरोपम तक लिखती रहे तब भी भगवान राम के गुणों का अंत नही आ सकता।कहा भी है -हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता।रघुराई मन्दिर में बिराजमान हो गए।दुनिया ने उल्लास उत्साह और उन्माद की चरम सीमा की पराकाष्ठा को निहाला।सूर्य की किरणें जब कमल पर गिरती है तो कमल विकसित हो जाता है।वह अपनी महक चारो और बिखेर देता है।हर जगह देश दुनिया मे भगवान की स्तुति की गई।राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर दुनिया अधीर नजर आई थी।राम को हुए सहस्त्राब्दिया गुजर चुकी है।आज भी राम का पवित्र नाम हर एक के पवित्र मन मे समया हुआ है।लोगो ने जी भरकर उत्साह मनाया।नृत्य,भजन और शोभायात्रा से जीवन मे आस्था के पुष्प नवपल्लव किया।याद उन्ही को किया जाता है।जिन्होंने सम्यक प्रकार से संपादित किया है।राम का कृतित्व और व्यक्तित्व सचमुच अदभुत था।राम राम ही है।राम अनुपमेय है।राम का अनुकरण वर्तमान परिस्थितियों में नितांत आवश्यक है।भीतर बाहर उजाला करने वाले राम की प्राणप्रतिष्ठा दुनिया मे छीपी दीनता का नाश करेगा।रामभक्तों की मलिनता मिटेगी और अब उनकी स्तुति से समृद्धि आएगी।राम के नाम का स्मरण करके अतीत में अनेकों ने अपने जीवन मे सिद्धिया प्राप्त की है।हमे राम की प्रतिष्ठा के पश्चात स्वयं जुड़ना पड़ेगा।इसके लिए श्रद्धा की आवश्यकता है।अयोध्या का राज राम ने बटाऊ की तरह त्याग दिया।राम बाप का राज्य बटाऊ की नाई त्याग कर वन को चले गये।जो व्यक्ति भौतिक सुखों और व्यक्तियों को राम की तरह अनासक्त भाव से माने तो तो जीवन मे रामत्व उतर आएगा।और दुनिया की कोई परिस्थिति रामभक्त को परेशान नही कर सकेगी।अब जो भी मांगना है राम से मांगिये सभी मनोरथ पूर्ण होगा।लेकिन बाहरी चमक दमक को त्याग कर राम का आकर्षण ही राम से प्रीत कराना सिखाता है।जीवन के उपवन में सुख और शांति के सुमन खिले तो कैसे खिले?रेत को पेल कर तेल नही मिल सकता।पानी का बिलौना करके नवनीत प्राप्त करने की परिकल्पना भूल में ही हास्यास्पद है।भौतिक दृष्टि से इस संसार मे कोई कितनी ही गति प्रगति क्यो न कर ले,जीवन मे जब तक अध्यात्म का समावेश नही हो सकता।तब तक व्यक्ति अंतर बाह्य तनावों से मुक्त नही बन सकता है।अब राम आए है।हम स्तुति कर मनोकामना पूर्ति कर सकते ह

    *कांतिलाल मांडोत*

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031