भारत-मलेशिया संबंधों की नई सुबह संस्कृति, व्यापार और रणनीति की साझा यात्रा*
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*भारत-मलेशिया संबंधों की नई सुबह संस्कृति, व्यापार और रणनीति की साझा यात्रा*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आठ वर्षों बाद मलेशिया पहुँचना केवल एक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि भारत-मलेशिया संबंधों में विश्वास, आत्मीयता और भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण क्षण है। कुआलालंपुर हवाई अड्डे पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करना और उन्हें अपनी कार से कार्यक्रम स्थल तक ले जाना, दोनों देशों के रिश्तों की गर्मजोशी और आपसी सम्मान को दर्शाता है। यह दृश्य इस बात का संकेत है कि भारत और मलेशिया के संबंध अब औपचारिकताओं से आगे बढ़कर व्यक्तिगत भरोसे और गहरी समझ के स्तर पर पहुँच चुके हैं।
भारत और मलेशिया के रिश्तों की जड़ें इतिहास में बहुत गहरी हैं। सदियों पहले समुद्री मार्गों के जरिए भारतीय व्यापारी, विद्वान और सांस्कृतिक परंपराएँ मलाया प्रायद्वीप तक पहुँचीं। मसाले, नारियल, चाय और वस्त्रों के व्यापार के साथ-साथ भाषा, धर्म और संस्कृति का आदान-प्रदान भी हुआ। आज भी मलेशिया की संस्कृति में भारतीय प्रभाव साफ दिखाई देता है, विशेषकर तमिल समुदाय के माध्यम से। प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि कुआलालंपुर और कोच्चि में स्वाद एक जैसा लगता है, केवल भोजन का वर्णन नहीं है, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की ओर संकेत है जो दोनों देशों को जोड़ती है।
राजनयिक स्तर पर भारत और मलेशिया के संबंध मलेशिया की स्वतंत्रता के तुरंत बाद स्थापित हो गए थे। समय के साथ इन रिश्तों ने मजबूती हासिल की और दोनों देशों ने आपसी विश्वास के आधार पर सहयोग के नए आयाम जोड़े। वर्ष 2015 में इन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया और बाद में इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदला गया। इसका अर्थ यह है कि भारत और मलेशिया केवल व्यापार या राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क जैसे दीर्घकालिक और संवेदनशील क्षेत्रों में भी मिलकर काम कर रहे हैं।
मलेशिया में लगभग उनतीस लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो विश्व के सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक हैं। यह समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु की भूमिका निभाता है। भारतीय मूल के नागरिक मलेशिया की अर्थव्यवस्था, राजनीति, शिक्षा और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वहीं भारत के लिए यह समुदाय भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि हर भारतीय प्रधानमंत्री की मलेशिया यात्रा में प्रवासी भारतीय समुदाय विशेष केंद्र में रहता है।
व्यापार भारत–मलेशिया संबंधों का एक मजबूत स्तंभ है। मलेशिया भारत का दक्षिण-पूर्व एशिया में एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है, हालांकि भारत को कुछ वर्षों से व्यापार घाटे की चुनौती का सामना करना पड़ा है। भारत मलेशिया से मुख्य रूप से खाद्य तेल आयात करता है, विशेष रूप से पाम तेल, जो भारत की घरेलू आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इसके अलावा भारत मलेशिया से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, अर्धचालक से जुड़े पुर्जे, रसायन, पेट्रो रसायन उत्पाद, रबर और लकड़ी से बने सामान भी आयात करता है।
दूसरी ओर भारत मलेशिया को पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयाँ, वाहन, इस्पात, रसायन, वस्त्र और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी सेवाएँ निर्यात करता है। भारतीय दवा उद्योग मलेशिया में अच्छी पहचान रखता है, क्योंकि भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ वहाँ के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह भारतीय तकनीकी कंपनियाँ मलेशिया के डिजिटल विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते की समीक्षा की जा रही है, ताकि भारतीय उद्योगों और मलेशियाई भागीदारों दोनों को समान लाभ मिल सके।
मलेशिया से भारत को कच्चे माल और रणनीतिक आपूर्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। अर्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में मलेशिया की वैश्विक भूमिका भारत के लिए खास मायने रखती है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं मलेशिया के लिए भारत एक विशाल बाजार, तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के असीम अवसरों वाला देश है। भारत की जनसंख्या, डिजिटल ढाँचा और निर्माण क्षमता मलेशियाई कंपनियों को आकर्षित करती है।
रणनीतिक और सुरक्षा के स्तर पर भी भारत और मलेशिया एक-दूसरे के लिए बेहद अहम हैं। मलक्का जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और अवैध गतिविधियों से निपटना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। भारत की हिंद-प्रशांत दृष्टि और मलेशिया की क्षेत्रीय भूमिका एक-दूसरे के पूरक हैं। नौसैनिक सहयोग और रक्षा संवाद के माध्यम से दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे रहे हैं।
डिजिटल और वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में सहयोग भारत–मलेशिया संबंधों को भविष्य की दिशा दे रहा है। भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र अब विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और मलेशिया में इसके विस्तार से न केवल भारतीय प्रवासियों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध भी और मजबूत होंगे। यह सहयोग दर्शाता है कि भारत और मलेशिया भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए मिलकर तैयारी कर रहे हैं।
भारत की ‘पूरब की ओर बढ़ो’ नीति में मलेशिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन इस नीति का केंद्र है और मलेशिया इसका प्रभावशाली सदस्य है। भारत इस संगठन के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते को अधिक संतुलित और आधुनिक बनाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में मलेशिया का समर्थन भारत के लिए निर्णायक हो सकता है। भारत चाहता है कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि घरेलू उद्योगों और रोजगार के लिए भी लाभकारी हो।
हालाँकि भारत–मलेशिया संबंधों में कुछ संवेदनशील मुद्दे भी रहे हैं, जिनमें जाकिर नाइक का मामला प्रमुख है। इसके बावजूद दोनों देशों ने संवाद और सहयोग का रास्ता बनाए रखा है। यह परिपक्व कूटनीति का उदाहरण है, जहाँ मतभेदों के बावजूद साझा हितों को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह मलेशिया दौरा इस बात का संकेत है कि भारत और मलेशिया अपने ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। संस्कृति, व्यापार, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग के जरिए यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और गहरी हो सकती है। भारत के लिए मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का एक भरोसेमंद द्वार है और मलेशिया के लिए भारत एक उभरती वैश्विक शक्ति। यही आपसी महत्व और विश्वास भारत–मलेशिया संबंधों को भविष्य में नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।

*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*
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