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ढाका में सुनवाई के दौरान बंग्लादेश कोर्ट ने शेख हसीना को लोगो की हत्या का दोषी माना* ,*फांसी की सजा*

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*ढाका में सुनवाई के दौरान बंग्लादेश कोर्ट ने शेख हसीना को लोगो की हत्या का दोषी माना* ,*फांसी की सजा*
शेख हसीना, जो लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीतिक हीरोइन और सत्ता में रहने वाली प्रधानमंत्री रही हैं, अब गंभीर आरोपों का सामना कर रही हैं। अभियोजकों के अनुसार, 2024 के बड़े छात्र-प्रदर्शनों के दौरान उनकी सरकार ने हिंसा भड़काने और मानवता के ख़िलाफ अपराध करने में भूमिका निभाई।संगठित, सुनियोजित हमलाअभियोजकों का दावा है कि प्रदर्शनवाद एक सिस्टमैटिक अटैक था ।हसीना ने पुलिस, सुरक्षा बलों और अपने समर्थक पार्टी कार्यकर्ताओं को इस्तेमाल किया ताकि विद्रोह को दबाया जाए। गोलियों और घातक हथियारों का आदेश का भी आरोप है।एक लीक हुई ऑडियो कॉल में, हसीना कथित तौर पर कहती हैं कि उन्होंने घातक हथियारो के इस्तेमाल का आदेश दिया और कहा, जहां भी उन्हें मिलें, गोली मार दो।हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल और अभियोजक यह आरोप लगा रहे हैं कि हसीना के निर्देश पर प्रदर्शनकारियों पर लड़ाकू कार्रवाई के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया

निर्दिष्ट हत्याएँ विशेष रूप से, एक छात्र प्रदर्शनकारी अबू सैयद की हत्या का आरोप है।वह 16 जुलाई, 2024 को रंगपुर में करीब से गोली मारे जाने का शिकार बनाए गए थे, और अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह आदेश हसीना की सरकार की नीति का हिस्सा था। मानवता के खिलाफ अपराध शामिल है।अभियोजन ने पांच गंभीर आरोप लगाए हैं। उनमें साजिश, प्रोत्साहन सहायता-सहभागिता ,व्यवस्थित हत्या में विफलता आदि शामिल हैं। एक्सटरमिनेशन (नाश) का आरोप और कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों के संहार की योजना थी, यानी यह सिर्फ दमन नहीं, बल्कि व्यापक पैमाने पर नष्ट करने का इरादा था।
ट्रायल और कोर्ट की भूमिकाबांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल इस मामले की सुनवाई की गई। अभियोजन पक्ष के चीफ वकील मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने कहा है कि सबूतों की जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि ये हमले विस्थापित, व्यापक और सुनियोजित थे। हसीना की अनुपस्थिति में ट्रायल चल रहा है और वह भारत में है और प्रवासन में हैं। अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड की मांग की और उन्हें सजा भी सुनाई है। यह कहकर कि इन कार्रवाइयों को अ-संगठित नागरिकों के खिलाफ संगठित आपराधिक अपराध माना जाना चाहिए। वहीं, हसीना और उनके वकील इस ट्रायल को राजनीतिक प्रेरित बता रहे हैं।
रिपोर्ट्स कहती हैं कि ट्रायल लाइव हो रहा है, लोगों को प्रक्रिया की पारदर्शिता देने का प्रयास किया जा रहा है।
*हसीना का प्रतिवाद और इनकार*
हसीना ने आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि ये पूरी तरह गलत और राजनैतिक प्रेरित हैं। उन्होंने पूर्व में कहा है।मुझे मुकदमा चलाओ, मुझे फर्क नहीं पड़ता।मैं वापस आऊँगी।अपनी प्रतिरक्षा में, वह भारत सरकार और जनता का शुक्रिया अदा किया है, यह कहकर कि भारत ने उन्हें संरक्षण दिया है।
हसीना की ओर से यह तर्क है कि ट्रिब्यूनल, जिसे उन्होंने पहले ही स्थापित किया था, अब उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।इसका मतलब अगर उसकी भविष्य की दशा-परिस्थिति देखें, तो हसिनके लिये चुनौतियाँ है।
ट्रायल में आरोप में दोषी ठहने के दो केस की सुनवाई मृत्युदंड की सजा दी हैं। न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी रहेगी और यह महत्वपूर्ण होगा कि ट्रायल न्यायसंगत हो, क्योंकि यह सिर्फ बांग्लादेश के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार मानकों के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है।
उनका रूढ़-राजनीतिक समर्थन अभी भी कितना है? क्या उनके पुराने समर्थक (Awami League) उन्हें छोड़ देंगे, या वे उनकी रक्षा करेंगे?हसीना को दोषी ठहरायी गई है। अब वह राजनैतिक मे कैसे लौट सकती हैं?अब राजनीतिक भविष्य धूमिल हो जाएगा?
क्या वह भारत में शरणदाता के रूप में रहने की स्थिति बनाए रखेंगी, या किसी राजनीतिक समझौते के हिस्से के रूप में बांग्लादेश लौटने का निर्णय लेंगी?
*नैतिक और सामाजिक परीक्षा*
जनता की आंखों में उनकी छवि कैसी है? नायिका, दमनकारी, या दोषी?परिवारों और पीड़ितों के प्रति जिम्मेदारी और पुनर्स्थापनात्मक न्याय की मांग पर कैसे प्रतिक्रिया देंगी?यह परीक्षण होगा कि वह सिर्फ शक्ति की राजनीति में वापस आना चाहेंगी, या अपराधों के लिए जवाबदेही स्वीकार करेंगी।राजनीतिक दिवालियापन या पुनरागमन? ट्रायल में उन्हें दोषी पाया गया है।तो उनका राजनीतिक औद्योगिककरण बंद हो सकता है यह उनका पुनरागमन बहुत मुश्किल बना देगा।लेकिन यह पूरी तरह निर्भर करेगा ट्रायल की निष्पक्षता और जनता के दृष्टिकोण पर। *भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर परीक्षा*
भारत के लिए यह परीक्षण है कि वह हसीना को समर्थन देते हुए अपने बाहरी संबंधों और कानून-न्याय नीति को कैसे संतुलित करेगा।बांग्लादेश की वर्तमान सरकार और अंतरिम प्रशासन के साथ भारत की नीतिगत स्थिति कैसे विकसित होगी ।क्या भारत हसीना की वापसी को अनुमति देगा, या ट्रायल में हस्तक्षेप करेगा?अंतरराष्ट्रीय दबाव मानवाधिकार संगठन, पड़ोसी देश कैसे बिकेगा, और इनका भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दीर्घकालीन असर क्या होगा?
*भारत-बांग्लादेश रिश्ते पर असर*
हसीना की यह स्थिति और ट्रायल न सिर्फ बांग्लादेश के अंदरूनी राजनीति को प्रभावित कर रही है, बल्कि भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
शरण और प्रत्यर्पण मुद्दाहसीना फिलहाल भारत में हैं। भारत को यह तय करना होगा कि क्या वह उन्हें प्रत्यर्पित करने की मांग को स्वीकार करेगा या नहीं। अगर भारत उन्हें प्रत्यर्पित नहीं करता, तो यह एक राजनीतिक तनाव का स्रोत बन सकता है।राजनीतिक गठबंधन और समर्थन अगर हसीना को दो केस में सजा सुनाई है और अगर तीन केस में हसीना को दोषी ठहराया जाय तो मुश्किल होगी। अगर सबूत के अभाव के बरी कर दिया जाए तो वह फिर से राजनीतिक रूप से सक्रिय हो सकती हैं और भारत-बांग्लादेश के रणनीतिक तालमेल में वह फिर एक कारक बनेंगी। अगर दोषी पायी जाती हैं,इसलिए भारत को उनकी वापसी का समर्थन देना मुश्किल हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय छवि और मानवीय दबाव विरोध पैदा करता है।
भारत एक लोकतांत्रिक देश के रूप में अपनी छवि बनाए रखना चाहता है। यदि वह हसीना को खुलकर समर्थन करता है, तो यह मानवाधिकार समूहों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आलोचना का कारण बन सकता है। दूसरी ओर, हसीना का प्रत्यर्पण या ट्रायल में दोषसिद्धि भारत की न्याय-और कूटनीति क्षमता की कसौटी बन सकती है।
आर्थिक-व्यापारिक असरबांग्लादेश-भारत के व्यापार और आर्थिक सहयोग में राजनीतिक अस्थिरता एक बड़ा खतरा है। हसीना के मुद्दे पर तनाव बढ़ने से निवेश, व्यापार और सीमापार सहयोग प्रभावित होंगे।
क्या हसीना को बांग्लादेश वापस जाना चाहिए। एक बहुआयामी दृष्टिकोण है और एक व्यक्ति के लिए दोनो देशो के बीच बढ़ता तनाव कारण हो सकता है।अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल नही कि क्या शेख हसीना को बांग्लादेश लौट जाना चाहिए? औऱ उसका जवाब है,
हाँ ,लौटना जाना चाहिए और न्याय का सामना करनाचाहिए।
उन्हें दोषी ठहराया है और यह दिखा सकता है कि कोई भी चाहे वह कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो , न्याय के दायरे से बाहर नहीं है।यह पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को न्याय देने का रास्ता हो सकता है और देश में जवाबदेही की भावना को मजबूत कर सकता है।
बरी होने की स्थिति में, उनका लौटना राजनीतिक पुनरागमन का एक मौका हो सकता है। वह अपने समर्थकों को फिर से जुटा सकती हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकती हैं।
यह बांग्लादेश की राजनीति को स्थिर करने में मदद कर सकता है, बशर्ते कि वह लोकतांत्रिक नियमों का सम्मान करें।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में स्पष्टता है किउनका लौटना प्रत्यर्पण या न्याय प्रक्रिया के माध्यम से हो, यह भारत-बांग्लादेश के बीच कानूनी और कूटनीतिक मुद्दों पर स्पष्टता ला सकता है।साथ ही, यह भारत को दिखा सकता है कि वह न्याय, अंतर्राष्ट्रीय नियमों और मानवाधिकारों के प्रति कटिबद्ध है। शेख हसीना के वापस लौटने का जोखिम भी है।
हसीना की वापसी बांग्लादेश में फिर से राजनीतिक रैलियों, प्रदर्शनकारियों और विद्रोह की संभावना को बढ़ा सकती है।
यह सामाजिक विभाजन को और बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों में जो उनके शासनकाल को दमनकारी मानते हैं।
अगर ट्रायल पूर्वाग्रही या राजनीतिक दबाव से प्रभावित है, तो उनका वापस आना सिर्फ एक नाटक हो सकता है और न्याय की प्रक्रिया को लक्ष्च्छेभूत कर सकता है।अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दलों के आरोप हो सकते हैं कि न्याय नहीं की जा रही बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है।
भारत के लिए राजनयिक जोखिम है।यदि भारत सक्रिय रूप से हसीना के प्रत्यर्पण को समर्थन देता है, तो यह बांग्लादेश की वर्तमान सरकार या जनता में नकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है।भारत की छवि पर भी असर हो सकता है। कुछ विदेश नीति विद्वान यह कह सकते हैं कि भारत न्याय को अपने हितों के लिए प्रयोग कर रहा है।
शेख हसीना के खिलाफ लगे आरोप में दो आरोप में सजा हुई है।।गोलियों का आदेश, लीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल, छात्र-प्रदर्शनों का क्रंचडाउन, और मानवता के खिलाफ अपराध बेहद गंभीर हैं। अगर अभियोजन पक्ष के दावे दो में सजा सुनाई। यह बांग्लादेश के लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ होगा।उनके सामने अब पाँच बड़े टेस्ट्स हैं।कानूनी जवाबदेही, राजनीतिक पुनरागमन, नैतिक पुनर्स्थापनात्मक न्याय, भारत-बांग्लादेश संबंधों में संतुलन, और अपनी छवि की बहाली। इन परीक्षणों का परिणाम न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत नियति तय करेगा, बल्कि बांग्लादेश की आगे की राजनीतिक दिशा और भारत-बांग्लादेश संबंधों की कसौटी भी बनेगा।
जहां तक सवाल है कि उन्हें लौटना चाहिए या नहीं ?लेक़िन उनको लौटना उनकी जिम्मेदारी हो सकती है, अगर वह न्याय प्रणाली पर भरोसा रखती हैं और देश में जवाबदेही की प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं। यह न सिर्फ पीड़ितों की ओर से न्याय हो सकता है, बल्कि बांग्लादेश के लोकतंत्र को भी मजबूत कर सकता है। लेकिन यह फैसला बहुत जोखिमों के साथ भी आता है ।राजनीतिक अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय दबाव, और न्याय की पारदर्शिता यह सब महत्वपूर्ण कारक हैं।भारत की भूमिका भी निर्णायक है।उसे यह देखना होगा कि हसीना को प्रत्यर्पित करना, या न करना, उसके लिए दीर्घकालीन रणनीतिक, कूटनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण से कैसे मुनासिब है।

*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*

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