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गोगुन्दा एवं सायरा क्षेत्र में अष्टमी पर हवन में दी आहुतियां, यज्ञ महोत्सव कार्यक्रम में यजमानों ने लिया हिस्सा*

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*गोगुन्दा एवं सायरा क्षेत्र में अष्टमी पर हवन में दी आहुतियां, यज्ञ महोत्सव कार्यक्रम में यजमानों ने लिया हिस्सा*
उदयपुर 22 अक्टूम्बर
कांतिलाल मांडोत
उदयपुर तहसील के गोगुंदा ,ओगाणा एवं सायरा क्षेत्र में नवरात्र की अष्टमी के उपलक्ष्य में माँ के दरबार मे भक्तो का हुजूम उमड़ा, वही आज यज्ञ का आयोजन किया गया।तरपाल के उपलापडा स्थित बायण माता परिसर में हवन किया गया।सायरा के माता के मंदिर में यज्ञ का आयोजन किया गया।अनेक श्रद्धालुओ ने भाग लिया।

भानपुरा में यज्ञ एवं प्रसादी का कार्यक्रम रखा गया।गोगुन्दा स्थित मंदिर प्रांगण में हवन में आहुतियां दी गई।उपखंड के रावल ऋषि की तपोभूमि प्रभु श्री एकलिंग नाथ की पावन धरा रावलगढ़ रावलिया खुर्द में शरदीय नवरात्रि महोत्सव में दुर्गा अष्टमी पर श्री अंबे मां श्री बाण मां सेमरा माताजी के मंदिर में भक्तो द्वारा यज्ञ महोत्सव का आयोजन किया गया ।साथ ही श्री सेमरा माताजी नवयुक मण्डल द्वारा भव्य प्रसादी का आयोजन रखा गया जिसमें गांव के सैकड़ों भक्तो द्वारा दर्शन व प्रसादी का लाभ लिया।

 

यज्ञ को महिमा एवं उनके विधि-विधानों का विस्तृत वर्णन शास्त्रों में मिलता है. उनके अध्ययन से लगता है कि शायद ऐसा कोई कार्य नहीं है जो यज्ञ से नहीं हो सकता और इसलिए ही अन्य विज्ञानों की तरह इस विज्ञान पर विदेशों में न सिर्फ शोध हो रहे है, बल्कि श्रद्धा व विश्वास के साथ बड़े-बड़े अनुष्ठान संपन्न किए,


जा रहे है वहां इन यज्ञों का प्रचार-प्रसार फैलता जा रहा है. यह बात अलग है कि हमारे यहां जैसे अन्य पूजा- अर्चनाओं के माध्यम से धार्मिक जनमानस का धूर्त व पाखण्डियों द्वारा शोषण किया जाता है वैसा ही यज्ञ आयोजनो द्वारा भी होता है, पर इससे यज्ञ की गरिमा व महिमा पर थोड़ी सी भी खरोंच नहीं आ सकती. क्योंकि यज्ञ प्रक्रिया में प्रायः हर पदार्थ की कारण शक्ति को उभारा जाता है तभी वह यजनकर्ता के मन और अंतःकरण में अभीष्ट परिवर्तन लाती है, यदि इस प्रकार के प्रयत्न न किये जाएं तो फिर यह अग्निहोत्र अपना प्रभाव बाष्पीकरण स्तर का दिख सकेगा. यज्ञ की विशिष्टता उसमें प्रयुक्त होनेवाले पदार्थों की सूक्ष्म शक्ति पर निर्भर है. अमुक काष्ठ का अमुक शाकल्य का निषेध इसी आधार पर किया गया है

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