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कर्नाटक विधानसभा में भाजपा की करारी हार का आत्ममंथन जरूरी

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कर्नाटक विधानसभा में भाजपा की करारी हार का आत्ममंथन जरूरी

कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा को झटका देते हुए कांग्रेस बहुमत से विजय हुई।दक्षिण का एकमात्र राज्य भी भाजपा से हाथ ने छीन लिया।कांग्रेस ने क्षेत्रीय नेतृत्व और स्थानीय मुद्दे तुरुप के पत्ते साबित हुए।कांग्रेस को जीत की उम्मीद नही थी।भाजपा की करारी हार के बाद भाजपा के विकास के मुद्दे की जगह स्थानीय मूलभूत सुविधाओं से वंचित मतदाताओं ने कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया।कांग्रेस के पास अब चार राज्य में सरकार है।भाजपा के अतिविश्वास के चलते जनता ने हिजाब बैन जैसे मुद्दे को दरकिनार किया गया।34 साल बाद कांग्रेस की दक्षिण में जीत से आगामी इस वर्ष अन्य राज्यो में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी हालत बदल सकते है।भाजपा ने मुस्लिम कोटा खत्म कर वोकालिगा और लिंगायत समुदाय के दो दो प्रतिशत आरक्षण की गणित से समीकरण बदल गए।13 प्रतिशत मुस्लिम आबादी और दो प्रतिशत ईसाई समाज के मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट दिया। कांग्रेस ने कभी नही सोचा होगा कि भारी मतों से कर्नाटक में जीत हो जाएगी?पिछले सभी राज्यो में हारने के बाद कांग्रेस को कर्नाटक हासिल होना कांग्रेस के लिए संजिवनी समान है।हिमाचल प्रदेश को छोड़कर कांग्रेस की हालत खराब थी।राममंदिर, बजरंगबली केरल स्टोरी और हिजाब के मुद्दे टाय टाय फीस साबित हुए,वही कांग्रेस के भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे कांग्रेस को फलीभूत करने में सफल हुए।।भाजपा को विकास के मुद्दे को दरकिनार कर आम जनता को राहत दिलाने के लिए बिजली,पानी और राशन जैसे मुद्दे पर ध्यान देना होगा। भाजपा झंझट को मोल ले रही है।भाजपा को अहंकार छोड़ना पड़ेगा।सीधे सीधा फायदा राहत कैम्पो से मिलने वाली कीट पर वोट किया जा रहा है तो भाजपा को विकास की बातो पर नही उलझना चाहिए।क्योंकि विकास का मुद्दा पुराना होता जा रहा है।आम निरक्षर व्यक्ति के लिए विकास के क्या मायने है?लेकिन भाजपा को गरीब और मध्यम वर्ग के लोगो को मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान देना होगा ।क्योकि आज जनता जो चाहती है उसी के अनुरूप राजनीतिक दलों को झुकना पड़ता है।इस जीत से कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है।कई राज्यो में चुनाव प्रचार के लिए नही आने वाली कांग्रेस अब जोश के साथ मैदान में उतरेगी।मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तेलंगाना और राजस्थान के विधानसभा चुनाव इस वर्ष होने है।कांग्रेस बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे को लेकर घेर रही है।वही भाजपा कांग्रेस के कार्यकाल की जन्मकुंडली खंगाल रही है।उससे क्या वास्ता?कांग्रेस पर भाजपा भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ने में सफल होती दिख रही है।वही कांग्रेस इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की देश के लिए शहादत पर संवेदनशील बनकर वोट बटोर रही है।उनके दादी और पिता को देश के लिए शहीदी की बात पर जोर दिया जा रहा है।कांग्रेस की जीत ऐतिहासिक कह सकते है।उसके लिए भाजपा को अपना मत स्पष्ट करना है।नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर बैठी देखी राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को फिर से जवाबदेही सौंप कर भाजपा चिंता मुक्त हो सकती है।अभी से छह महीने बाद राजस्थान में विधानसभा के चुनाव है।राजस्थान की पूर्व मुख्ययमंत्री वसुंधरा राजे को चुनाव प्रचार के लिए आलाकमान आदेश कर उनकी भूमिका को साझा करें।कांग्रेस ने कर्नाटक में पांच मुद्दे की घोषणा की और कांग्रेस को जनता ने स्वीकार कर लिया।कांग्रेस के जीत में बड़े कारण कारणभूत रहे है।राहुल की भारत जोड़ो यात्रा,कांग्रेस ने 40 प्रतिशत भागीदारी का मुद्दा जोरशोर से उछाला, अभियान के साथ दो सौ यूनिट फ्री बिजली और पुरानी पेंशन योजना की बहाली कांग्रेस की जीत की बड़ी वजह रही है।भाजपा पर 40 प्रतिशत भ्रष्टाचार का आरोप भाजपा से कोई खास जवाब नही मिलना,बीएस येदियुरप्पा से मुख्यमंत्री पद छीनना, टिकट वितरण में धांधली और पार्टी में गुटबाजी हावी रही।जिसके कारण मतदाताओं ने उन्हें ठुकरा दिया।कांग्रेस के वादों पर लोगो ने भरोसा किया।भाजपा ने इस हार से सबक नही लिया तो आगामी दिनों में भाजपा को मुश्किल डगर पार करनी पड़ सकती है।


कांतिलाल मांडोत 

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