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महाशिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब देर शाम तक गूंजता रहा हर-हर महादेव, भक्तों की लंबी कतारें*

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*महाशिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब देर शाम तक गूंजता रहा हर-हर महादेव, भक्तों की लंबी कतारें*

बिना जैन
सूरत 15 फरवरी 2026
सूरत शहर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवालयों में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह भोर में मंदिरों के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। वराछा के टीकमनगर स्थित बटुकेश्वर महादेव मंदिर से लेकर पूणा बॉम्बे मार्केट रोड के शिवालयों तक “बम बम भोले” और “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि और शिव भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया।

टीकमनगर स्थित राधा कृष्ण मंदिर परिसर में बिराजित शिवलिंग को आकर्षक फूलों से सजाया गया। सुबह से ही श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, आक, गंगाजल और दूध लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण रहा कि युवाओं से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक सभी में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

पूणा बॉम्बे मार्केट रोड स्थित शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। कई भक्त व्रत रखकर पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहे। दोपहर बाद भीड़ कुछ कम जरूर हुई, लेकिन जैसे-जैसे शाम ढली, मंदिरों में फिर से रौनक बढ़ती गई। देर शाम आरती के समय तो ऐसा लगा मानो पूरा शहर शिवभक्ति में डूब गया हो। मंदिरों के बाहर प्रसाद और पूजन सामग्री की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ रही।
शहर के अन्य प्रमुख शिवालयों में भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। कतारों में खड़े भक्त शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई स्थानों पर स्वयंसेवकों ने जल वितरण और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था संभाली। शाम के समय विशेष श्रृंगार आरती और भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजे मंदिरों का दृश्य मनमोहक रहा।

महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन उपवास, रात्रि जागरण और शिवपूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जल, बेलपत्र और धतूरा जैसे साधारण अर्पण भी उन्हें प्रिय हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
देर शाम जैसे ही महाआरती का समय नजदीक आया, सूरत के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई। परिवार सहित पहुंचे लोगों ने दर्शन कर भगवान शिव से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। कई मंदिरों में मध्यरात्रि तक विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का कार्यक्रम निर्धारित किया गया। पूरे दिन शहर शिवमय रहा और हर ओर आस्था की धारा बहती रही। महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व ने एक बार फिर सूरतवासियों को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

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