नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9974940324 8955950335 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , राष्ट्रहित पर राजनीति और कांग्रेस की दोहरी मानसिकता* – भारत दर्पण लाइव

राष्ट्रहित पर राजनीति और कांग्रेस की दोहरी मानसिकता*

Oplus_131072

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

*राष्ट्रहित पर राजनीति और कांग्रेस की दोहरी मानसिकता*

भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई अवसर आए हैं जब देश ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया और जनता ने अपने नेतृत्व पर भरोसा करते हुए त्याग किया। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक युद्ध संकट, बढ़ती तेल कीमतों और विदेशी मुद्रा पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सोने की खरीद कम करने और अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने की अपील की, तब कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी इसे सरकार की विफलता बताने लगे। यह वही कांग्रेस है जो अपने इतिहास के सबसे बड़े उदाहरणों को भी भूल चुकी है।
देश को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत ने संकट के समय हमेशा सामूहिक त्याग और अनुशासन के बल पर विजय प्राप्त की है। वर्ष 1965 में जब देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी। उस समय अमेरिका भारत को शर्तों के साथ अनाज देने को तैयार था, लेकिन शास्त्री जी ने इसे देश के स्वाभिमान के खिलाफ माना। उन्होंने पहले अपने परिवार पर प्रयोग किया और फिर पूरे देश से कहा कि एक समय भोजन छोड़कर राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें। उस दौर में जनता ने बिना सवाल किए इस अपील को स्वीकार किया। गांवों से लेकर शहरों तक लोगों ने एक वक्त का भोजन त्याग दिया ताकि देश विदेशी दबाव के सामने झुके नहीं।
यह घटना केवल इतिहास नहीं बल्कि भारतीय समाज की राष्ट्रभक्ति और अनुशासन का सबसे बड़ा प्रमाण है। उस समय कांग्रेस के नेताओं और विपक्ष ने इसे “विफलता” नहीं कहा था। किसी ने यह आरोप नहीं लगाया था कि प्रधानमंत्री जनता पर बोझ डाल रहे हैं। क्योंकि उस समय राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित था। लेकिन आज कांग्रेस की राजनीति इतनी संकुचित हो चुकी है कि यदि देशहित में कोई अपील की जाती है तो उसे भी राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जो अपीलें की हैं, उनका उद्देश्य किसी पर बोझ डालना नहीं बल्कि वैश्विक संकट से देश को सुरक्षित रखना है। दुनिया इस समय युद्ध और आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री लोगों से ईंधन की बचत करने, कारपूलिंग अपनाने, मेट्रो का उपयोग बढ़ाने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की बात करते हैं तो यह दूरदर्शिता है, विफलता नहीं।
कांग्रेस की समस्या यह है कि वह हर राष्ट्रीय मुद्दे में केवल राजनीतिक लाभ खोजती है। जब देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब कांग्रेस उसे रोकने का प्रयास करती दिखाई देती है। मोदी सरकार ने पिछले वर्षों में भारत को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया है, वह पूरी दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। देश डिजिटल क्रांति में अग्रणी बन चुका है। करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खुले, गांवों तक बिजली पहुंची, मुफ्त राशन योजना से गरीबों को सुरक्षा मिली और भारत वैश्विक मंचों पर मजबूत आवाज बनकर उभरा।
कांग्रेस के शासनकाल में भारत को हर छोटे संकट में विदेशी संस्थाओं और देशों के सामने झुकना पड़ता था। कभी अमेरिका के दबाव में निर्णय लिए जाते थे तो कभी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की शर्तों पर देश की नीतियां तय होती थीं। लेकिन आज भारत दुनिया को आंखों में आंखें डालकर जवाब देता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी आत्मनिर्भरता की बात करते हैं। वे चाहते हैं कि भारत विदेशी निर्भरता कम करे और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए।
सोने के आयात को कम करने की अपील भी इसी सोच का हिस्सा है। भारत हर वर्ष भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा सोने के आयात पर खर्च करता है। यदि संकट के समय कुछ समय के लिए संयम बरता जाए तो उससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसी तरह पेट्रोल और डीजल की बचत केवल आर्थिक नहीं बल्कि पर्यावरणीय आवश्यकता भी है। दुनिया के विकसित देश भी ऊर्जा बचत के लिए जनता से अपील करते हैं। लेकिन भारत में कांग्रेस हर सकारात्मक प्रयास का मजाक उड़ाने लगती है।
राहुल गांधी का यह कहना कि “देश चलाना मोदी के बस की बात नहीं” वास्तव में उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। जनता जानती है कि मोदी सरकार ने कठिन परिस्थितियों में भी देश को मजबूत बनाया है। कोरोना महामारी के समय भारत ने न केवल अपने नागरिकों को वैक्सीन दी बल्कि दुनिया के कई देशों की मदद भी की। सीमाओं पर भारत की ताकत बढ़ी है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आई है। अंतरिक्ष से लेकर तकनीक तक भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह सब किसी कमजोर नेतृत्व में संभव नहीं होता।
सच्चाई यह है कि कांग्रेस आज भी पुराने राजनीतिक ढर्रे से बाहर नहीं निकल पाई है। उसे लगता है कि केवल आलोचना करके जनता का समर्थन मिल जाएगा। लेकिन देश अब बदल चुका है। जनता समझती है कि राष्ट्रहित में कभी-कभी सामूहिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। जिस तरह लालबहादुर शास्त्री की अपील को देश ने स्वीकार किया था, उसी तरह आज भी लोग समझते हैं कि संकट के समय देश के साथ खड़ा होना आवश्यक है।
विडंबना यह है कि कांग्रेस अपने ही नेताओं की विरासत भूल चुकी है। यदि शास्त्री जी आज जीवित होते तो शायद कांग्रेस उन्हें भी “विफल प्रधानमंत्री” कह देती। क्योंकि आज की कांग्रेस का उद्देश्य राष्ट्रहित नहीं बल्कि केवल सत्ता प्राप्ति रह गया है। वह हर उस कदम का विरोध करती है जिससे भारत मजबूत बनता है।
भारत आज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा है। दुनिया भारत को नई आशा के रूप में देख रही है। वैश्विक संस्थाएं भारत की आर्थिक क्षमता की सराहना कर रही हैं। विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। भारतीय तकनीक, उद्योग और युवाशक्ति दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। ऐसे समय में देश को नकारात्मक राजनीति नहीं बल्कि सकारात्मक सोच की आवश्यकता है।
राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का काम नहीं होता। उसमें जनता की भी भूमिका होती है। यदि देशहित में कुछ समय के लिए संयम बरतने की अपील की जाती है तो उसे राजनीति का मुद्दा बनाने के बजाय राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए। भारत ने हमेशा त्याग, अनुशासन और एकता के बल पर चुनौतियों को हराया है और आगे भी हर संकट से मजबूती के साथ बाहर निकलेगा।

           

     *कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031