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सूरत में बढ़ती गर्म मौसम की मार और बढ़ता स्वास्थ्य संकट*

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*सूरत में बढ़ती गर्म मौसम की मार और बढ़ता स्वास्थ्य संकट*
कांतिलाल मांडोत
28 नवम्बर 2025
जिसे देश के सबसे व्यवस्थित और तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है, इन दिनों मौसम के अचानक बदलते मिज़ाज से जूझ रहा है। नवंबर–दिसंबर की शुरुआत में जहाँ आमतौर पर हल्की ठंड का एहसास होने लगता है, वहीं इस बार तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं दिखी। इसके विपरीत, पिछले कुछ दिनों में पारा लगातार चढ़ा है और गुरुवार को तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। यह तापमान इस मौसम के औसत से काफी अधिक है, जिसके कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और शहर के अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ने लगी है।अगले कई दिनों तक31 32तक रहने की संभावना जताई जा रही है।

स्मीमेर अस्पताल में ओपीडी के बाद दवाई लेते मरीज- कांतिलाल मांडोत

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार उत्तर भारत की ठंडी हवाएँ समय पर दक्षिण गुजरात की ओर नहीं बढ़ सकीं। अरब सागर से आ रही नम और गर्म हवाओं ने तापमान को एक बार फिर ऊपर धकेल दिया, जिसके चलते सूरत में सर्दी की शुरुआत फीकी पड़ गई। शहर में दिन के समय तेज धूप और रात में असामान्य गर्माहट के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। आमतौर पर इस समय तक शहर में हल्की ठंड महसूस होने लगती थी, लेकिन इस बार मौसम की अनियमितता ने लोगों को चौंका दिया है।
सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य पर पड़ा है। सहारा दरवाजा स्थित मनपा-संचालित (एसएमआईएमईआर) स्मीमेर, अस्पताल में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, ओपीडी में बीते सप्ताह के मुकाबले 20 से 25 प्रतिशत अधिक मरीज आने लगे हैं। इनमें विशेष रूप से खांसी, जुकाम, बुखार, सांस लेने में परेशानी, उल्टी-दस्त जैसी मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। तापमान के उतार–चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है, जिससे वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है।
चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में अचानक बदलाव बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। दिन में गर्मी और शाम होते ही हवा में हल्की ठंडक के कारण शरीर तापमान के अनुरूप खुद को ढाल नहीं पाता। नतीजतन गले में खराश, खांसी, तेज बुखार और थकान जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं। कई मरीज उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की समस्या लेकर अस्पताल पहुँचे हैं, जिसका मुख्य कारण बढ़ती गर्मी और शरीर में पानी की कमी है। एसएमआईएमईआर अस्पताल में पंजीकृत मरीजों की संख्या यह संकेत दे रही है कि मौसम की वर्तमान स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।शहर में डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छरजनित रोगों के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। इस मौसम में इन बीमारियों का कम होना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन तापमान अधिक होने के कारण मच्छरों का जीवनचक्र धीमा नहीं हुआ है। नगर निगम की ओर से नियमित फॉगिंग और सर्वे किए जा रहे हैं, फिर भी कई क्षेत्रों में डेंगू और मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि असामान्य गर्मी मच्छरों के प्रजनन को रोकने के बजाय बढ़ावा देती है और यही स्थिति रोगों के फैलाव का कारण बन रही है।
शहर के लोगों को इस असामान्य मौसम में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बाहर निकलते समय हल्के और ढीले कपड़े पहनें, पर्याप्त पानी पिएँ, धूप में अधिक देर तक न रहें और मौसम के अनुसार भोजन में बदलाव करें। बढ़ती गर्मी के कारण निर्जलीकरण की समस्या बढ़ रही है, जिसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा बंद कमरों में एसी या कूलर का अत्यधिक उपयोग करने से भी वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए घरों में हवा का प्राकृतिक आवागमन बनाए रखना जरूरी है।
मौसम का यह अनिश्चित स्वरूप केवल एक अस्थायी बदलाव नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर बदलते जलवायु चक्र का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में गुजरात के तापमान में लगातार असमानता देखी जा रही है। कभी असमय बारिश, कभी कड़ाके की ठंड और अब अनियंत्रित गर्मी , ये सभी संकेत बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव स्थानीय स्तर पर भी गहरा होता जा रहा है। सूरत जैसे तटीय शहर इसका सबसे अधिक प्रभाव झेल सकते हैं, क्योंकि यहाँ तापमान समुद्री हवाओं के उतार–चढ़ाव पर निर्भर करता है।


स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करवाएँ। बुखार तीन दिन से अधिक रहे तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लें। डेंगू और मलेरिया के मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है, क्योंकि देर होने पर स्थिति बिगड़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँचे, जिसके कारण उनकी स्थिति जटिल हो गई।महापालिका भी बढ़ती मरीज संख्या से सतर्क हो गया है। अस्पतालों में अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है, ओपीडी समय बढ़ाया गया है और संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए विशेष टीमों की तैनाती की गई है। शहर में कई स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें लोगों को पानी उबालकर पीने, घरों में जमा पानी निकालने और मच्छर रोधी उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल, सूरत के लोगों को इस असामान्य गर्मी और स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए स्वयं को तैयार रखना होगा। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। सूरत का मौसम चाहे जो कहे, लेकिन यदि लोग जागरूक रहें, समय पर उपचार लें और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें, तो बढ़ती बीमारी की इस चुनौती पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
इस समय शहर के लिए सबसे बड़ी जरूरत है मौसम की अनिश्चितता को समझना, अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाना और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना। मौसम की मार को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं, लेकिन सतर्कता, समय पर इलाज और जागरूकता से उसके दुष्परिणामों को अवश्य कम किया जा सकता है। सूरत आज जिस स्थिति से गुजर रहा है, वह केवल एक मौसम समाचार नहीं, बल्कि हमें चेतावनी देता संदेश है कि बदलती जलवायु के बीच स्वास्थ्य की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

            कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार

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