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सूरत: पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाले कोनोकार्पस के 2 लाख पेड़ों को काटेगी महानगर पालिका

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सूरत: पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाले कोनोकार्पस के 2 लाख पेड़ों को काटेगी महानगर पालिका
सूरत 31 अक्टूबर
कांतिलाल मांडोत
महानगर पालिका ने अनजाने में डिवाइडर पर कोनोकार्पस के पौधे लगाए हैं

कोनोकार्पस के सबसे अधिक पेड़ वराछा-बी जोन में हैं

महानगर पालिका के एक सर्वे में पता चला है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कोनोकार्पस के 2 लाख पेड़ हैं। इसमें सबसे अधिक वराछा-बी जोन में हैं। गुजरात सरकार ने कोनोकार्पस पर प्रतिबंध लगाया है। महानगर पालिका और शहरवासियों से अनजाने में इसके पौधे को लगाकर बड़ा किया है। नगर निकाय की गार्डन समिति के सदस्य बृजेश उनकट ने कोनोकार्पस के पेड़ों को काटने की मांग की थी।
महानगर पालिका के सर्वे में सामने आया है कि 65290 मीटर डिवाइडर में कोनोकार्पस के पेड़ हैं। एक मीटर में दो पेड़ मानें तो कुल 1 लाख, 30 हजार पेड़ होते हैं। इसके अलावा बीआरटीएस रूट में भी कोनोकार्पस के पौधे लगाए गए हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में 13430 बड़े वृक्ष हैं।
महानगर पालिका के सर्वे में फार्म हाउस, पार्टी प्लॉट, बंगले के आसपास लगे पेड़ों की गिनती नहीं की गई है। इससे जाहिर है कि शहर में कोनोकार्पस के पेड़ों की संख्या ज्यादा हो सकती है। महानगर पालिका ने अठवा जोन से कोनोकार्पस के पेड़ों को काटने की शुरुआत कर दी है। घोड़ दौड रोड और पार्ले पॉइंट में फ्लाय ओवर ब्रिज के नीचे लगाए गए पेड़ काट दिए गए हैं। आने वाले दिनों में शहर से कोनोकार्पस के पेड़ काट दिए जाएंगे।
कोनोकार्पस के पेड़ों से होने वाले नुकसान
कोनोकार्पस को सप्तपर्णी कहा जाता है। इसके फूलों से सर्दी-जुकान, अस्थमा और एलर्जी जैसी बीमारियां होती है। इसके अलावा इसकी पत्तियां जानवरों के लिए भी हानिकारक हैं। कोनोकार्पस के पेड़ों में सर्दियों में फूल आते हैं और आसपास के इलाकों में पराग फैलाते हैं। यह गहरे हरे चमकदार पत्तों वाली एक सदाबहार पौधे की प्रजाति है। इसकी जड़ें काफी गहराई तक जाती हैं। इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने 26 सितंबर, 2023 को प्रतिबंध लगा दिया था। राज्य सरकार के आदेश से प्रदेशभर में उगे कोनोकार्पस के पेड़ काटे जा रहे हैं

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