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तीन राज्य में जीत के महानायक  मोदी की सतरंगा जीत*

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*तीन राज्य में जीत के महानायक  मोदी की सतरंगा जीत*
कांतिलाल मांडोत
गोगुन्दा 3 दिसम्बर
सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास की अवधारणा लेकर भाजपा 2014 में सत्ता के गलियारों तक पहुंची।उसके महानायक नरेंद्र मोदी थे।विधानसभा चुनाव में तीन राज्यो में जनता ने पूरा भरोसा दिखाया है।यहा मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया और यहा पर जो जनादेश मिला है।उससे कौम और कुनबे में बांटकर तीनो राज्यो को देखने वाले भौचक्के है।तुष्टिकरण की राजनीति कांग्रेस को धूल चटाती नजर आ रही है।ऐसा अचानक नही हुआ है।तौल माप कर जनता ने अपना फैसला सुनाया है।राजस्थान में उपहार के जोर पर सत्ता हासिल करने निकले अशोक गहलोत ने यह सोचा था कि घोषणाओ के बूते सरकार आ जायेगी।लिहाजा, दूसरी तरफ सौ यूनिट मुफ्त बिजली की योजना थी।लेकिन बिजली फाल्ट और तार टूटने का बहाना रोजमर्रा बन गया था।घण्टो तक बिजली बहाल नही की जाती थी।मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का विकास और मोदी पर भरोसा और महिलाओ को आगे रखकर लाडली बहना की योजना आखिरकार सफल होती दिखी।राजस्थान में भ्रष्टाचार को और पेपरलीक मामले के साथ उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड को भाजपा ने जोरशोर से उठाया।छत्तीसगढ़ का मशहूर नारा छत्तीसगढिया सबसे न्यारा की यह परिपाटी भाजपा को फायदा दिलाती गई।मुख्यमंत्री भूपेश बधेल के भ्रष्टाचार और मोदी की गारंटी की भी गारंटी का कार्ड फलित होता दिखाई दिया।तीनो राज्यो में भाजपा को सतरंगी जीत दी है।ऐसी जीत जो कई मायने में ऐतिहासिक है।

देश में विभेदकारी परिस्थितियों में चुनाव हुए है।यह जीत सतरंगा जीत है।तीनो राज्यो ने भाजपा के कंधों पर एक बड़े दायित्व के रूप में रखा है।अब 2024 में लोकसभा चुनाव में भाजपा को आगे बढ़ने से कोई रोक नही सकता है।
हर चुनाव में एक सामाजिक राजनैतिक रसायन होता है।चुनावी पंडित उसे समझ नही पाते ।वे जातपात के गणित में उलझे रहते है।राजस्थान में बेटियों की आवाज कांग्रेस सुनते हुए अनदेखी करती रही।दुष्कर्म की घटना और गरीब आदिवासी नाबालिग के साथ ब्लात्कार कर भट्टी में जिंदा जलाना लोगो का दिल जलता दिखाई दिया। मुसलमानों के धार्मिक त्योहार पर कांग्रेस छूट दे रही थी।वही हिन्दू धर्म और धर्मावलम्बियों पर सितम ढाह रही थी।हिन्दू धर्म के त्योहारों पर प्रतिबंधलगाना कांग्रेस को भारी पड़ गया।हिन्दू और हिंदुत्ववादी की बात कर राहुल गांधी ने खिल्ली उड़ाई और राम के अस्तित्व को नकारने वाली कांग्रेस हिन्दू वोट पर आधार कैसे रख सकती है?कांग्रेस राममय नही होगी,वहां तक कांग्रेस का उद्धार नही होगा।कोई भी दल यह नही सोचता है कि मतदाता क्या सोचता है।

अब कांग्रेस ईवीएम के बटन जो ब्रह्मास्त्र है उस पर निशाना साधती हुई नजर आएगी।कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने जहां भाजपा पर निशाना साधने की जरूरत थी,वही हर समय मोदी और अडानी पर निशाना साधा जाता था।यह हार का बड़ा कारण है।सामाजिक कटुता टूटेगी समरसता बढ़ेगी।इन राज्यो में जीत की फ़लश्रुति मोदी की तरफ जा रही है।जिनकी नीति,नेतृत्व और जनाभिमुख के आगे कायल हुए है।भ्रम का कुहासा छटा है।भाजपा के खिलाफ आंधी बेअसर हुई है।नकारात्मक राजनीति,जातिवादी राजनीति की,मुसलमानो को वोट की राजनीति में खिलौना बनाने की चली आ रहा प्रवृति की तीन राज्यो के मतदाताओ ने मर्मातक चोट की है।अपना स्पष्ट निर्णय सुनाया है।
कांग्रेस और राहुल गांधी भाजपा के विकास मंत्र पर जो प्रश्न खड़े कर रहे थे,जो भ्रम फैला रहे थे,वे बार बार सोचे।खूब सोचे।अब गांधी परिवार के बेटी बेटियों की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।गांधी परिवार को आगे करने वाली कांग्रेस को अब सोचना होगा कि राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के बूते देश जितने निकले है,वह कितना उचित है?राहुल ने कहा था कि एमपी गया,राजस्थान गया और छतीसगढ़ गया।तब अशोक गहलोत ने उनको टोंका और कहा कि राजस्थान और छतीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारं है।

राहुल के जुबान पर सरस्वती बैठी हुईं थी।भाजपा की तीनो राज्यो में जीत देश को दिशा मिलेगी।विकास यानी आर्थिक,आत्मिक,सामाजिक और राजनीति।भाजपा ने इसे प्राप्त कर लिया और इसके सहारे भारत नए नए सोपान तय करेगा।अब दुनिया को मार्गदर्शन करने की क्षमता बढ़ गई ।एक्जिट पोल ओपीनियन पोल ढाई दशक बाद भी विश्वास करने लायक माहौल नही बना पाए है।यह लगे तो तीर नही तो तुक्का जैसे ही है।मोदी के मंत्र से कांग्रेस ध्वस्त हो गई है। भाजपा ने इतिहास रच दिया है।राजस्थान में कांग्रेस ने यह सोच लिया कि काम बोलता है और घोषणा से बाजी मार लेंगे।लेकिन जनता बेवकूफ नही है।कांग्रेस की आगे की कठिन राह है।कांग्रेस में हार के बाद रार मच गई है।कांग्रेस ने हार का पता लगाने के लिए सभी दलो को एकजुट किया गया है।भाजपा ने कांग्रेस का भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरशोर से उठाया और उसी का परिणाम हमारे सामने आया है।कांग्रेस मंथन करे।

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