गुरुक्त त्रिजन्म जयंती पर पांच दिवसीय तप आराधना का शुभारंभ आज*
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*गुरुक्त त्रिजन्म जयंती पर पांच दिवसीय तप आराधना का शुभारंभ आज*
कांतिलाल मांडोत
गोगुंदा 12 अगस्त
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ एवं जैन श्रीसंघ गोगुंदा के तत्वावधान में गुरुक्त त्रिजन्म जयंती के पावन अवसर पर पांच दिवसीय तप आराधना का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक आयोजन का शुभारंभ बुधवार, 12 अगस्त से होगा, जो 16 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं विभिन्न धार्मिक क्रियाओं और तप आराधना के माध्यम से आत्मशुद्धि, संयम और साधना का लाभ अर्जित करेंगे।
आयोजन के तहत प्रथम दिवस 12 अगस्त को गुणानुवाद का कार्यक्रम रखा गया है। इस दिन श्रद्धालु गुरुजनों के गुणों का स्मरण एवं गुणानुवाद करते हुए धर्म आराधना में सहभागी बनेंगे। द्वितीय दिवस जाप उपशयहर स्त्रोत की आराधना की जाएगी। श्रद्धालु सामूहिक रूप से धार्मिक जाप एवं स्त्रोत के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करेंगे। तृतीय दिवस सामूहिक एकासन की आराधना होगी, जिसमें समाजजन संयम और तप के साथ एकासन कर धार्मिक लाभ प्राप्त करेंगे।
चतुर्थ दिवस दो-दो सामायिक की आराधना रखी गई है। सामायिक जैन धर्म में आत्मचिंतन, संयम और समता की महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु दो सामायिक के माध्यम से आत्मिक शांति और धार्मिक अनुशासन का अभ्यास करेंगे। पांचवें एवं अंतिम दिवस आयम्बिल की आराधना के साथ पांच दिवसीय धार्मिक आयोजन का समापन होगा। आयम्बिल जैन धर्म की महत्वपूर्ण तपस्या है, जिसमें साधक संयमपूर्वक निर्धारित आहार ग्रहण करते हुए तप और आत्मसाधना करता है।
गुरुक्त त्रिजन्म जयंती के अवसर पर आयोजित इस तप आराधना में साधु-साध्वियों के सान्निध्य का भी लाभ समाजजनों को प्राप्त होगा। आयोजन से जुड़े संतों एवं साध्वीवृंद के नामों में महाश्रमण जिनेन्द्र मुनि, तपस्वी प्रवीण मुनि सेवा रत्न, परम विदुषी डॉ. राजश्री मसा, डॉ. सुलक्षण प्रभाजी मसा, आध्यात्मिक चिंतन आचार्य सम्राट आनंद ऋषि मसा, साध्वी रत्न कौशल्या कुमारी मसा तथा उप प्रवर्तिनी साध्वी चारित्र प्रभा मसा का उल्लेख किया गया है। उनके मार्गदर्शन एवं सान्निध्य में होने वाली धार्मिक आराधना से समाजजनों में आध्यात्मिक चेतना और धर्म के प्रति आस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आयोजकों ने बताया कि पांच दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रावक-श्राविकाओं को तप, त्याग, संयम और धार्मिक आराधना से जोड़ना है। गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ आत्मकल्याण की भावना से विभिन्न धार्मिक क्रियाओं में सहभागी बनने का अवसर इस आयोजन में उपलब्ध कराया जा रहा है।
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ एवं जैन श्रीसंघ गोगुंदा ने समाज के सभी श्रावक-श्राविकाओं से इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनने और धार्मिक आराधना का लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है। पांच दिनों तक चलने वाली यह तप आराधना श्रद्धा, संयम और साधना का विशेष अवसर मानी जा रही है। आयोजकों ने समाजजनों से आयोजन में सहभागिता कर गुरुभक्ति एवं धर्म आराधना का लाभ लेने की अपील की है।
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