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इंसानियत पर काला धब्बा है पहलगाम का आतंकी हमला*

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*इंसानियत पर काला धब्बा है पहलगाम का आतंकी हमला*
पहलगाम का आतंकी हमला मानवता पर काला कलंक है।पुलवामा अटैक में 47 जवान शहीद हुए थे।उसके बाद की यह सबसे बडी घटना है।नाम और धर्म पूछकर आतंकियों ने गोली मारी थी।जो यह कहते थे कि आतंकियों का कोई धर्म नही होता है।उस कहावत को गलत ठहराते हुए आतंकियों ने 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया।जिसमें विदेशी सैलानी भी शामिल थे।आतंकियों का लक्ष्य कश्मीर नही होकर अन्य शहर को टारगेट करना है और आतंकियों को प्रैक्टिस दी जा रही है।यह हिन्दू मुस्लिम के बीच बढ़ रही खाई का ही परिणाम है कि आतंकवादियों ने निर्दोष व्यक्तियों पर हमले करने का सीधा मार्ग प्रशस्त कर दिया है।कश्मीर की वादियों में अमन-चैन और जवानों की चाकचौबंद व्यवस्था को देखते हुए आतंकवादियों ने हमला करने का रास्ता ही बदल दिया है। यह हमला देश के लिए कलंक समान है।

प्रशिक्षित आतंकियों के पनाहगार पाकिस्तान ने सांत्वना के दो शब्द नही कहे है। लेकिन भारत पर ही निशाना साधते दिखे।जबकि सारा किया धराया पाकिस्तान का ही है।हिंदुओ को भारत भूमि पर ही निशाना बनाया जाता है तो विदेश में उन अल्पसंख्यक हिंदुओ की क्या दशा होती होगी, जहा सरकार भी हिंदुओ को सुरक्षा प्रदान नही कर रही है।आतंकवाद का जड़मूल से सफाया करने और जीरो टॉलरेंस की नीति पर हम भरोसा कर सरकार के हाथ मजबूत करने के लिए तैयार है,लेकिन सवाल यह है कि इस तरह से निर्दोष लोगों को आए दिन आतंकी मौत के घाट उतार रहे है तो फिर हम कहा जाए?

देश सबका है हम सबका देश है फिर भी हम खुद असुरक्षित महसूस कर रहे है।सरकार ने जिस कश्मीर में चाकचौबंद व्यवस्था की है ,वहां पर आतंकी घुस भी नही सकते है।इसलिए आतंकवादी पर्यटक स्थलो पर हमला कर रहे है।इस घटना के बाद तो पर्यटक आवागमन ही बन्द हो जाएगा। दरअसल,जब से जम्मू कश्मीर में प्रादेशिक पार्टी की सरकार बनी है ,उसके बाद आतंकियों के हौसले बुलंद है।आतंकवाद को कुचलने की मंशा पर सरकार की नीतियों पर पहलगाम की घटना ने पानी फेर दिया है।आतंकियों का लक्ष्य हिंदुओ को टारगेट करना है।जिस तरह से कश्मीरी पंडितो ने पलायन शुरू किया गया था।उसी की तर्ज पर पहलगाम और जम्मू तक आतंकियों के हमले का मुख्य लक्ष्य दहशतगर्दी फैलाना है।पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन लश्कर ए तैयबा के आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने हमले की जिम्मेदारी ली है।2019 के बाद बनाया गया द रेजिस्टेंस फ्रंट आतंकवाद को एक स्वदेशी प्रतिरोध आंदोलन के रूप में चित्रित करना था।

आतंकवाद की जड़े हिलाने के लिए सरकार के पास विकल्प के तौर पर क्या है? पुलवामा हमले का बदला हवाई हमले से लिया गया था।पाकिस्तान के आतंकियों ने टूरिस्ट पैलेस की अप्रैल में रेकी करवाई गई।जिसमे पहलगाम की होटले एवं तीन चार आतंकियों ने अंजाम दिया गया था। मोदी सऊदी की यात्रा छोड़ लौटे है औऱ सीवीसी की बैठक आयोजित करने की पूरी संभावना है ।मनीष को उनके बच्चों के सामने मारा तो कांके निवासी मयंक को मौत खींच लाई,वे थोड़े समय पहले ही पहाड़ी से निचे उतरे थे। खासबात तो यह है कि नौसेना अध्यक्ष की शादी छह दिन पूर्व ही हुई थी।उसके पति को पत्नी के समक्ष गोली मार दी।आतंकवाद और सरकार के बीच की दूरियां कम नही हुई तो इसी तरह पहलगाम जैसे हमले के लिए तैयार रहना होगा।आतंकी हमला निंदनीय और मानवता पर कलंक समान है।आतंकी जैसे क्रूर पौराणिक काल के राक्षक भी ऐसी हरकत नही करते होंगे।भगवान मृतक आत्माओं को शांति प्रदान करे।

                                     कांतिलाल मांडोत

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